फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किडनी कांड में पांच डाक्टरों को पांच-पांच वर्ष जेल

Fri, 08 Nov 2013 11:04 PM IST
अमर उजाला, अमृतसर
विज्ञापन
विज्ञापन
अमृतसर के बहुचर्चित किडनी कांड में अदालत ने शुक्रवार को छह दोषियों को सजा सुनाई। इनमें पांच डाक्टरों को पांच-पांच साल कैद और 72-72 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
विज्ञापन


अदालत ने हरियाणा पुलिस के उस पूर्व इंस्पेक्टर को भी आठ साल कैद की सजा सुनाई जिसने दोषियों के साथ मिलीभगत कर एक नाबालिग की किडनी अपने शरीर में ट्रांसप्लांट कराई थी।

अदालत ने इस पूर्व इंस्पेक्टर पर 82 हजार रुपये जुर्माना भी ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर सभी दोषियों को छह माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद सभी दोषियों को जेल भेज दिया है। अदालत ने इस मामले में गत दो नवंबर को छह लोगों को दोषी ठहराया था।

अमृतसर के जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जीएस बख्शी की अदालत ने हरियाणा पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर सुरेश कुमार को आठ वर्ष और पांच डाक्टरों ओपी महाजन, जगदीश गार्गी, अरजिंदर सिंह, एसएस भूटानी और एसके ग्रोवर को पांच-पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई।
विज्ञापन


डॉ. महाजन अमृतसर मेडिकल कालेज के पूर्व प्रिंसिपल हैं। डॉ. गार्गी मेडिकल कालेज अमृतसर के फोरेंसिक विभाग के पूर्व प्रमुख हैं। ये दोनों उस समय सरकार की ओर से बनाई गई ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट आथोराइजेशन कमेटी के सदस्य थे। डॉ. भूटानी जालंधर के रूबी अस्पताल के मालिक हैं।

 डॉ. अरजिंदर सिंह और डॉ. एसकेएस ग्रोवर भी रूबी अस्पताल से जुड़े हैं। दोषियों में सुरेश कुमार  हरियाणा पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर हैं। सुरेश ने नाबालिग बगीचा सिंह की किडनी धोखे से अपने शरीर में ट्रांसप्लांट करवाई थी।

शिकायतकर्ता की हो गई है मौत
यह मामला नवंबर 2002 में उस समय के एसपी सिटी-1 कुंवर विजय प्रताप ने उजागर किया था। इस गोरखधंधे को बेनकाब कर थाना कोतवाली में केस दर्ज किया गया।

इस बारे में शिकायत एक नाबालिग लड़के बगीचा सिंह के बयान पर दर्ज हुई थी। बगीचा का आपरेशन किडनी में पत्थरी का रोग बताकर किया गया था लेकिन बाद में सेहत संबंधी मुश्किल आने पर जब बगीचा ने अपना दोबारा डायग्नोज करवाया तो यह बात सामने आई कि उसकी एक किडनी निकाली जा चुकी है।

 बगीचा ने इसकी शिकायत पुलिस को दी थी। कुछ समय बाद बगीचा की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई लेकिन यह केस सरकार बनाम आरोपी डाक्टरों के बीच चलता रहा।

कई ने किए थे किडनी निकालने के खुलासे
आम तौर पर इस मामले में बाहरी राज्यों से मजदूरी करने आए लोगों को शिकार बनाया जाता था। इसके बाद कुछ अन्य मामले भी थाना डी डिवीजन और थाना सिविल लाइन पुलिस में दर्ज हुए।

 इनमें अन्य राज्यों से आने वाले मजदूरों ने उनकी किडनी निकाले जाने के खुलासे किए थे। बाद में दर्ज हुए मामलों में कुछ वकील और न्यूरो सर्जन डाक्टरों के भी नाम आए। इनके खिलाफ मामले अभी अदालतों में विचाराधीन हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें