फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेल्फी प्वाइंट नहीं जलियांवाला बाग, दर्द की जिंदा तस्वीर है यह - सुखदेव सिंह सिरसा

विज्ञापन
विज्ञापन
अमृतसर। सर्व भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि जलियांवाला बाग सेल्फी प्वाइंट नहीं, बल्कि दर्द की एक जिंदा तस्वीर है। उन्होंने लेखकों, कवियों, इतिहासकारों और साहित्यकारों से एकजुट होकर युवाओं को विरासत से जोड़ने की अपील की।
विज्ञापन

सिरसा ने ये बातें रविवार को गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में जलियांवाला बाग : अतीत और वर्तमान विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के समापन पर कहीं। कार्यक्रम में देश भर से जाने-माने कवि पहुंचे थे। प्रोफेसर गुरदेव सिंह सिद्धू ने जलियांवाला बाग घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जलियांवाला बाग की घटना के बाद कैसे अंग्रेजी हुकूमत ने इस घटना से संबंधित सामग्री को जब्त करना शुरू कर दिया था। इससे अखबारों और लेखन सामग्री को छापने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेलों में भेजा गया। अंग्रेेजों ने नए कानून बनाकर बगावत करने वालों पर जुल्म करना शुरू कर दिया था।
पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. जसबीर सिंह ने कहा कि यह एक बड़ा मामला था, जिसे अंग्रेजी हुकूमत के पिठ्ठुओं ने छिटपुट मामला बनाने की कोशिश की। इस हत्याकांड के बाद ही अंग्रेजी हुकूमत के पतन की असली शुरुआत हुई थी। सरबजीत सिंह ने कहा कि पंजाब शुरू से ही खुशहाल और खेती प्रधान प्रदेश रहा है। 1870 के बाद जितनी भी जन लहर शुरू हुई हैं, वह सेल्फ डिफेंस तक सीमित रहीं। अन्य प्रवक्ताओं ने कहा कि जलियांवाला बाग में कत्लेआम करने वाला जनरल डायर मारा गया। परंतु आज भी भारत में ऐसे जनरल डायर मौजूद हैं जो देश में हो रहे दंगों, हत्याकांड और देश विरोधी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। रमेश यादव ने अंत में सभी का धन्यवाद किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें