दसवीं पातशाही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम के साथ रामायण को जोड़कर पेश करना गलत है, इससे सिख भावनाओं को ठेस पहुंची है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सचिव एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने यह बात एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही। उन्होंने कहा कि दसवीं पातशाही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने कोई रामायण नहीं लिखी, लेकिन कुछ लोग उनके नाम के साथ रामायण को जोड़कर सिख भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने दशम ग्रंथ में चौबीस अवतार वाले खंड में अलग-अलग चौबीस अवतारों के बारे में एक रामावतार की बात की है। उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ पात्र रामायण वाले हैं, लेकिन युद्ध विधान, विवरण और स्वरूप अलग है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर की नींव रखते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दसवीं पातशाही की ओर से लिखी रामायण का जिक्र किया था, जिसका सिख संस्थाओं और विद्वानों ने भारी विरोध किया है। उन्होंने इस पुस्तक पर तुरंत रोक लगाने की मांग करते हुए संगत को सचेत होने की अपील भी की।