अमृतसर। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना व आटा-दाल स्कीम के तहत गरीबों के आवंटन के लिए आए 1800 टन गेहूं को गायब करने के मामले में फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ मामले की जांच के लिए हेडक्वार्टर से पहुंची विभागीय टीम मामले में इलाके के सुपरवाइजिंग अधिकारी एएफएसओ (सहायक फूड सप्लाई अधिकारी) की शमूलियत की जांच में जुटी है। फूड एंड सिविल सप्लाई उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव के इंस्पेक्टर हीरा चौहान को निलंबित किए जाने के यह आदेश पत्र संख्या 2635 में किए हैं।
यह है मामला
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना व आटा-दाल स्कीम के तहत जनवरी और मार्च 2022 के दौरान वेरका केंद्र में गेहूं भेजा गया। विभागीय अधिकारी ने इसके लिए लाभपात्रियों की पर्चियां भी काटी, लेकिन उन्हें गेहूं नहीं दिया गया। इसकी विभाग को शिकायत किए जाने पर आला अधिकारियों ने इसमें शामिल इंस्पेक्टर हीरा चौहान को निलंबित कर दिया। सिर्फ इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई पर विभागीय एएफएसओ शिवराज खन्ना ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि इसमें सुपरवाइजिंग की ड्यूटी कर रहे अधिकारी की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है, जितनी एक इंस्पेक्टर की। गेहूं आवंटन का काम दोनों अधिकारियों के आपसी तालमेल के साथ होता था।
चीफ विजिलेंस कमेटी ने दर्ज किए बयान
विभाग की चीफ विजिलेंस कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के संयुक्त डायरेक्टर अजयवीर सिंह सराओ के नेतृत्व वाली वेरका सेंटर में हुए करीब 1800 टन गेहूं का घपला मामले में जांच करने पहुंची है। यह कमेटी संबंधित एएफएसओ की शमूलियत को लेकर भी जांच कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सीडब्ल्यूसी कमेटी ने शुक्रवार को जहां जंडियाला के एक और वेरका के दो गोदामों की इंस्पेक्शन की, वहीं दूसरी तरफ उन डिपो होल्डरों के बयान भी दर्ज किए, जिनके लाभपात्रियों के नाम गेहूं आवंटन को लेकर पर्चियां बांटी गई थी।
जांच में शामिल होने कमेटी के समक्ष पहुंचा एक अधिकारी
वेरका सेंटर से गायब हुए 1800 टन गेहूं व इससे पहले जिला में हुए फूड सप्लाई विभाग के मामलों को लेकर विभाग का एक सीनियर अधिकारी सीडब्ल्यूसी कमेटी के समक्ष पहुंचा और खुद को जांच में शामिल करने की बात कही। मगर कमेटी के चेयरमैन ने इस अधिकारी को जांच शामिल करने से इनकार कर दिया। इसके बाद इस अधिकारी ने शुक्रवार को एक बार फिर जिले में गरीबों के अनाज आवंटन को लेकर हुई गड़बड़ियों को लेकर मुख्यमंत्री को शिकायत कर दी, ताकि गड़बड़ियों के लिए मामले की उच्चस्तरीय जांच के बाद इसके लिए जिम्मेदार हर एक अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।