संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। जीएसटी काउंसिल की मीटिंग सितंबर के महीने होने जा रही है। इस बार इस मीटिंग में काफी कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अपने भाषण के दौरान घोषणा की गई है कि इस बार जीएसटी की स्लैब में बदलाव किया जाएगा। ऐसे में जीएसटी माहिरों से जानते है कि आखिर किस तरह के बदलाव से व्यापार बढ़ेगा, आम लोगों को फायदा होगा और साथ ही साथ रोजगार के भी नए अवसर पैदा होंगे।
जीएसटी प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट विकास खन्ना का कहना है कि जीएसटी शुरू होने के बाद से टेक्सटाइल इंडस्ट्री डाउनफाल में गई है। क्योंकि पिछले कई सालों से कैपिटल सब्सिडी स्कीम बंद है और उसकी एवज में कोई भी अन्य स्कीम नहीं लाई गई। जिससे कि इस इंडस्ट्री को बूस्ट मिल सके। ऐसे में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में धागे पर 12 प्रतिशत की स्लैब है जो खत्म किए जाने की घोषणा है लेकिन इसे कम करके पांच प्रतिशत में लाया जाए। इससे इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर और ज्यादा पैद होंगे।
बहुत सारी दवाइयां अभी भी 12 प्रतिशत की स्लैब में आती हैं। अगर सरकार 12 प्रतिशत की स्लैब खत्म करती है तो उन सभी दवाइयों को पांच प्रतिशत में लाया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को दवाइयां खरीदने में समस्या न हो।
इसी तरह किसी भी तरह का बीमा करवाने पर 18 प्रतिशत स्लैब लागू होती है। इसे भी कम करके पांच प्रतिशत में लाया जाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें। जीएसटी लाने का मकसद एक देश एक टैक्स था लेकिन उसे फाॅलो नहीं किया गया। इसलिए इसका सरलीकरण किया जाना चाहिए। मौजूदा समय में इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर सबसे ज्यादा समस्या है। अदालतों में या ट्रिब्यूनल सबसे ज्यादा केस इसी के फंसे हुए हैं। ऐसे में जीएसटी 2.0 में इसी समस्या को ध्यान में रखा जाना चाहिए।