श्री आनंदपुर साहिब में शुक्रवार रात 12 बजे किला आनंदगढ साहिब में पुरातन रिवायत अनुसार पांच पुरातन व ऐतिहासिक नगाड़े बजाने पर हुई। समागम में हिमाचल प्रदेश से संगत नगर कीर्तन के रूप में एसजीपीसी मेंबर डॉ. दलजीत सिंह भिंडर की अगवाई में किला आनंदगढ साहिब में पहुंची।
ज्ञानी मल्ल सिंह ने संगत को होला मुहल्ला के महत्व के बारे में बताया। इस के बाद पगड़ी की रस्म निभाते हुए मैनेजर भाई रेश सिंह को तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह व आए महापुरुषों ने पांच पगड़ियां बांधी।
जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह ने अरदास की। रात 12 बजे के बाद रणजीत नगाड़ा, तख्त श्री केसगढ साहिब का नगाड़ा, किला आनंदगढ़ साहिब का नगाड़ा, किला आनंदगढ साहिब के लंगर हाल वाला नगाड़ा व गुरुद्वारा शहीदी बाग के नगाड़े बजा कर होले मुहल्ले के शुरू होने का ऐलान किया गया।
इस मोके पर बाबा गुरुदेव सिंह शहीदी बाग वाले, बाबा तीर्थ सिंह तपस्थान वाले, कमेटी मेंबर अमरजीत सिंह चावला, सुरिंदर सिंह , एडवोकेट हरदेव सिंह, मनजिंदर सिंह बराड़, सुरिंदर सिंह मटोर, महिंदर सिंह माहल प्रधान सेवा दल, बाबा तरलोचन सिंह मौजूद थे।
वहीं खालसा पंथ की चढ़दी कला का प्रतीक प्रसिद्ध राष्ट्रीय पर्व होला मोहल्ला शनिवार को श्री कीरतपुर साहिब के गुरुद्वारा पतालपुरी साहिब में शुरू हो गया। पहले दिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ साहिब आरंभ किए गए। तख्त श्री केसगढ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल्ल सिंह के अरदास करने के साथ जयकारों की गूंज में होला मोहल्ला आरंभ हो गया।
ज्ञानी मल्ल सिंह ने कहा कि दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना करके समाज में फैले अंधेरे को दूर किया और होली को होले मोहल्लो का नया स्वरूप दिया। उन्होंने कहा कि गुरू साहिब ने इस दिन खालसा फौज को जंगजूं खेलों के साथ जोड़ा।
होले मोहल्लों के पहले दिन बड़ी संख्या में संगतें अपने वाहनों पर सवार होकर गुरू घरों में नतमस्तक होने के लिए आनी शुरू हो गई। इस मौके शिरोमणि समिति के सदस्य भाई अमरजीत सिंह चावला, रेशम सिंह मैनेजर तख्त श्री केसगढ़ साहिब, हेड ग्रंथी भाई हरपाल सिंह, भाई निर्मल सिंह, अमरजीत सिंह जिंदवड़ी उपमैनेजर गुरुद्वारा पतालपुरी साहिब,मनजिंदर सिंह बराड़, तेजवीर सिंह जागीरदार, संदीप सिंह मौजूद रहे।