जिले के ढूंग क्षेत्र में पांडवों के अज्ञातवास की निशानी बाबा मुक्तेश्वर मंदिर और यहां गुफाए हैं। सरकार की अनदेखी के चलते करीब 5500 वर्ष पुरानी इस एतिहासिक धरोहर मंदिर और गुफाओं के अस्तित्व पर संकट है। गुफाओं की हालत खराब होती हो जा रही हैं।
वहीं बैराज प्रोजेक्ट पूरा होने पर मुक्तेश्वर मंदिर के पानी में डूब जाने का खतरा है।। सरकार की अनदेखी से इसे संभालने के लिए जय बाबा मुक्तेश्वर धाम महादेव प्रबंधक कमेटी के प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं।
मंदिर बचाओ कमेटी के चेयरमैन नवीन अग्रवाल, महासचिव भीम सिंह के मुताबिक अज्ञातवास दौरान पांडवों ने यहां 6 महीने बिताए थे। इस दौरान उन्होंने ढूंग में गुफाओं का निर्माण कर शिवलिंग स्थापित किया था। उस काल की रसोई और बाथरूम के प्रमाण आज भी यहां मौजूद हैं। यहां अमावस्या, नवरात्र, बैसाखी और शिवरात्रि पर मेला भी लगता है। इस स्थान को छोटा हरिद्वार के नाम से भी जाना जाता है। आज इसकी दीवारें कई स्थानों से खत्म हो चुकी है।
मंदिर बचाओ कमेटी के मुताबिक बैराज प्रोजेक्ट के नक्शे में मंदिर की साइट को दिखाया गया है। कमेटी ने पांडवकालीन गुफाओं और शिव मंदिर को बचाने के लिए राजस्व विभाग के सचिव, मुख्यमंत्री, पुरातत्व विभाग सहित केंद्र सरकार को भी पत्र लिखा है। लोगों की मांग है कि गुफाओं के साथ दीवार बनाकर मंदिर को सुरक्षित किया जाए।
कमेटी के पदाधिकारियों के मुताबिक इस समय मंदिर से जल का स्तर 401 मीटर है। बैराज बनने से यहां पानी का स्तर 405 मीटर हो जाएगा। इससे मंदिर पानी में डूब जाएगा। कमेटी इस ऐतिहासिक स्थल को झील में आने से बचाने के लिए स्टेट को भी लेटर लिख चुके हैं, लेकिन किसी भी तरफ से मंदिर को बचाने के लिए कोई आश्वासन नहीं मिला।
बांध प्रशासन भी मंदिर को बचाने के लिए गंभीर नहीं है। वहीं कमेटी ने मंदिर के पास एक दीवार बनाने की मांग उठाई है, ताकि जल का बहाव इस ओर से कम हो जाए और मंदिर को क्षति न पहुंचे।