अमृतसर। साल 1921 में हुए साका ननकाना साहिब के शहीदों की याद में एसजीपीसी की ओर से गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल में गुरमति समागम करवाया गया। इस अवसर पर श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद भाई जगतार सिंह राजपुरा के जत्थे ने गुरुबानी कीर्तन किया और कथावाचक भाई हरमित्तर सिंह संगत को गुरमति विचारों के साथ जोड़ा।
उन्होंने साका श्री ननकाना साहिब के शहीदों को श्रद्धा और सत्कार भेंट करते हुए कहा कि पहले पातशाह श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश स्थान को स्वयंभू महंतों से आजाद करवाने के लिए सिख योद्धाओं ने जिस दृढ़ता और दिलेरी का प्रगटावा किया, वे सिख कौम को संगठित करने में मील-पत्थर साबित हुआ। उन्होंने कहा कि कौम के इन महान शहीदों से सेध लेकर कौमी भविष्य की प्राथमिकताएं निर्धारित करना आज की बड़ी जरूरत है।
खासकर सिख युवाओं को सिखी प्रति भविष्य की जिम्मेवारियां निभाने के लिए सिख-इतिहास और गुरमति सिद्धांतों पर दृढ़ता के साथ पहरा देना जरूरी है। इस समागम में एसजीपीसी के अतिरिक्त सचिव प्रताप सिंह, श्री दरबार साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह मथरेवाल, सुपरिंटेंडेंट मलकीत सिंह बहिड़वाल, मैनेजर बघेल सिंह, सुपरवाइजर काबल सिंह, कुन्नन सिंह भी मौजूद थे।