पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने कहा कि उन्होंने लोक भलाई पार्टी का गठन कर वर्षों तक लोगों की सेवा की। फर्जी ट्रेवल एजेंटों का शिकार होकर विदेशों में फंसे युवाओं को स्वदेश लाता रहे। लेकिन प्रदेश के लोगों ने मेरी पार्टी को वोट नहीं दिया। हताश होकर उन्होंने बादल परिवार के साथ दोस्ती की, जो उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। फोकल प्वाइंट स्थित हरभजन सिंह कैरों के आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामूवालिया ने कहा कि उन्होंने बादल परिवार के साथ जो ढाई वर्ष गुजारे, उसका उन्हें अफसोस है। इस परिवार ने सिख कौम की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हुए डेरा मुखी के साथ जो समझौता किया, उसकी सजा इस परिवार को जरूर मिलनी चाहिए।
रामूवालिया ने कहा कि बादल परिवार से दुखी प्रदेश के लोगों ने 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भरोसा किया। परंतु कैप्टन ने वादाखिलाफी का रिकॉर्ड कायम कर दिया। अगर अब भी कैप्टन ने चुनावी वादे पूरे न किए तो प्रदेश की सियासत से कांग्रेस का नामोनिशान खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाला समय अकाली दल (ड) का है। पार्टी अध्यक्ष सुखदेव सिंह ढींढसा के हाथ मजबूत करने लिए कोई कसर नहीं छोड़ूेंगे। वह दिन दूर नहीं जब अकाली दल टकसाली के अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा को भी ढींढसा ग्रुप के साथ जोड़ा जाएगा।
2012 में कैप्टन को दिया था ऑफर
रामूवालिया ने कहा कि 2012 उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह को ऑफर दिया था कि तरनतारन से उनके करीबी अमरीक सिंह वरपाल को अगर कांग्रेस का टिकट दे दें तो वह लोक भलाई पार्टी का कांग्रेस में विलय करने के लिए तैयार हैं। लेकिन कैप्टन ने एक सीट न देकर अपने हाथ आने वाली राज्य की सत्ता खुद गंवाई थी।