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भारत-पाक व्यापार बंद का असरः अटारी पर सन्नाटा, 1400 कुलियों पर संकट, 250 से ज्यादा ट्रक बिके

Fri, 22 Nov 2019 02:57 AM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अटारी सीमा (अमृतसर)
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अटारी बॉर्डर पर बंद। - फोटो : अमर उजाला
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भारत-पाकिस्तान के बीच इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के रास्ते होने वाले व्यापार के बंद हो जाने से पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया है। जहां कभी पाकिस्तान जाने के लिए ट्रक चालक अपनी बारी के इंतजार में कई-कई दिन खड़े रहते थे, आज वहां एक ट्रक नहीं दिखता।

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आईसीपी के अस्तित्व में आने के बाद लोडिंग-अनलोडिंग के लिए काम करने वाले 1400 से अधिक कुलियों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। जिन लोगों ने आईसीपी के कारण बैंकों से लोन लेकर ट्रक खरीदे थे, वह समय पर अपनी किश्त जमा नहीं करवा पा रहे। ऐसे में कुछ ट्रकों को बैंकों ने अपने कब्जे में ले लिया है। 

आईसीपी में व्यापार बंद होने के कारण ट्रक ऑपरेटरों का अटारी स्थित दफ्तर भी बंद हो चुका है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने की ट्रक ऑपरेटरों को दोहरी मार पड़ी। अटारी सीमा का व्यापार बंद होने के बाद ट्रक ऑपरेटरों को उम्मीद थी कि कश्मीर का सेब उठाकर वह अपनी रोटी-रोजी चला लेंगे, लेकिन इस बार यह भी संभव नहीं हो सका। 
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ट्रक ऑपरेटर लखविंदर सिंह ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार बंद होने से यहां से रोजी-रोटी कमाने वाले सभी लोगों को घाटा पड़ा है। अटारी ट्रक यूनियन की 400 गाड़ियां थी, अब डेढ़ सौ रह गई हैं। बाकी सभी गाड़ियां या तो बिक गई हैं या बैंकों ने किश्त न भरने पर कब्जे में ले ली हैं। ढाबे बंद हो चुके हैं और कुली घर बैठ गए हैं। 

अटारी में काम करने वाले ट्रक ऑपरेटरों को करतारपुर कॉरिडोर खुलने से उम्मीद है कि अटारी से बंद व्यापार भी खुल जाएगा। कुली निरपिंदर सिंह ने बताया कि व्यापार बंद हो जाने से उनके परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ चुके हैं। घर चलाने के लिए कई कुलियों ने तो अपना खेत तक गिरवी रख दिया है। 

मजदूर गुरबचन सिंह ने बताया कि अटारी में काम करते करते उसकी उम्र बीत गई। पहले वह अटारी रेलवे स्टेशन पर मजदूरी करता था। जब से आईसीपी से दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू हुआ, उसके परिवार की रोटी अच्छी चल रही थी। व्यापार बंद होने से उनके परिवार की औरतें शहरों में जाकर बर्तन साफ करने का काम कर रही हैं।

अटारी सीमा पर चाय बेचने वाले जरनैल सिंह ने बताया कि जब दोनों देशों के बीच व्यापार चलता था तो ट्रक चालक उसके ग्राहक थे। अब उसे भी मंदी का सामना करना पड़ रहा है। 15 साल से बॉर्डर पर चाय बेच रहे जरनैल ने कहा कि बॉर्डर बंद होने से अब यहां ट्रक चालक नहीं आते। काम ठप हो गया है। पहले रोज 15 से 20 किलो दूध की चाय बेचता था, अब एक किलो दूध की चाय नहीं बिक रही।  
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पाकिस्तान ने तीन वर्ष पहले ही पेरिशेबल गुड्स का व्यापार कर दिया था बंद 

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से होने वाले आयात में 200 फीसदी ड्यूटी बढ़ा दी थी। जिसका प्रभाव भी व्यापार पर पड़ा। भारत पाकिस्तान से सीमेंट, नमक, जिप्सम, पीओपी, कास्टिक सोडा, सोडा ऐश, कांच, ड्राई फ्रूट, खजूर और कबाड़ के टायर मंगवाता था। भारत से पाकिस्तान सोयाबीन, मुर्गीदाना, पेरिशेबल गुड्स, मसाले, कपास, ऑटोमोबाइल के पुर्जे, बिस्कुट, न्यूज प्रिंट, प्लास्टिक दाना और ताजा मीट मंगवाता था। पाकिस्तान सरकार ने तीन वर्ष पहले भारत से आने वाले टमाटर, अदरक, लहसुन का व्यापार बंद कर दिया था। इस कारण पाकिस्तान में इन पेरिशेबल आइटम की कीमतों में भारी इजाफा होता रहा है।

व्यापार बंद होने से 1500 करोड़ का नुकसान: औजला 
अमृतसर के सांसद गुरजीत औजला ने दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू करने के लिए दो दिन पहले संसद में आवाज उठाई है। औजला ने संसद में मांग की है कि पिछले समय में हुए पुलवामा हमले के बाद बंद पड़े भारत-पाकिस्तान व्यापार को तुरंत शुरू किया जाए। अटारी वाघा सीमा के माध्यम से होने वाले वार्षिक 1500 करोड़ रुपये के व्यापार के बंद होने से पांच हजार लोग सीधे तौर पर व दस हजार लोग अप्रत्यक्ष रूप में बेरोजगार हुए हैं। 
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