तख्त श्री पटना साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद सोमवार को समाप्त हो गया। दोनों तख्तों के पांचों सिंह साहिबानों ने सर्वसम्मति से पूर्व में जारी किए गए उन सभी हुक्मनामों को रद्द कर दिया है, जो हुकमनामे एक दूसरे तख्त और तख्तों के जत्थेदारों व पदाधिकारियों के खिलाफ जारी किए गए थे। दोनों तख्तों की गरिमा और सर्वोच्चता को बहाल करने के लिए यह फैसले लिए गए है।
पटना साहिब कमेटी ने जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब को पत्र लिखकर इस बात की क्षमा भी मांगी है। इस फैसले में ज्ञानी रणजीत सिंह गौहर के खिलाफ वहां की अदालत में दायर केस वापस लेने और पटना साहिब कमेटी को उनके बनते अधिकार देने का भी आदेश जारी किया गया है। दोनों तख्तों के पांचों सिंह साहिबानों ने आपस में सहमति जताते हुए आज इस विवाद को सुलझा लिया। इसके साथ ही तख्त श्री पटना साहिब से तनखइया घोषित किए गए ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज, बाबा टेक सिंह धनौला और सुखबीर सिंह बादल को भी आरोप मुक्त कर दिया गया है। वहीं, श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा भी तनखइया घोषित किए गए पटना साहिब कमेटी के सदस्यों को भी माफी पत्र भेजकर आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
अकाल तख्त साहिब पर हुई पांच सिंह साहिबान की बैठक के बाद जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि तख्त श्री पटना साहिब प्रबंधक कमेटी की ओर से 12 मई को एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें खालसा पंथ के व्यापक हितों और पंथक एकता की भावना को ध्यान में रखते हुए तख्त श्री पटना साहिब के संबंध में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णयों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है। इस पत्र में तख्त श्री पटना साहिब प्रबंधक कमेटी ने पांचों तख्त साहिबों में श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्ज की और भविष्य में भी सदैव समर्पित रहने का संकल्प लिया।
जत्थेदार कुलदीप सिंह ने बताया कि तख्त श्री पटना साहिब प्रबंधक कमेटी से प्राप्त पत्र पर विचार करने के लिए आज पंज सिंह साहिबानों की बैठक हुई, जिसमें 21 मई 2025 और 5 जुलाई 2025 को श्री अकाल तख्त साहिब में पंज सिंह साहिबानों की बैठकों में पारित प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया गया और खालसा पंथ के व्यापक हितों, पंथिक एकता और सिख संगत की भावनाओं को देखते हुए कुछ संशोधन किए गए।
उन्होंने बताया कि दूसरी ओर, तख्त श्री पटना साहिब के पांच प्यारे सिंह साहिबानों ने भी आज वहां बैठक कर श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को स्वीकार किया और 21 मई 2025 और 5 जुलाई 2025 को उनके द्वारा अतीत में पारित प्रस्तावों को वापस लेने का फैसला किया, जिसके संबंध में प्रस्ताव आज सचिवालय में पहुंच गया है। जत्थेदार गर्गज ने कहा कि वर्तमान समय सिख शक्ति को एकजुट करने का है और यह खुशी की बात है कि पिछले समय में दोनों तख्त साहिबों के बीच जो विवाद चल रहा था, वह अब पंथिक एकता की भावना से पूर्ण आपसी सहयोग और आम सहमति से समाप्त हो गया है।
उधर निहंग जत्थेबंदी बुढ्ढा दल के मुखी बाबा बलबीर सिंह ने दोनों तख्तों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ जारी हुक्मनामों को वापिस लेने का स्वागत किया और कहा कि इस से सिख पंथ के अंदर पैदा हुआ बहुत बड़ा विवाद ही खत्म नहीं हुआ बल्कि तख्त साहिबों की गरिमा भी प्रभावित होने से बच गई है।