अमृतसर। पंजाब के सीएम मान की ओर से रविवार को संगरूर में मेडिकल कॉलेज को लेकर शिरोमणि कमेटी पर रुकावटें खड़ी करने के लगाए आरोपों को एसजीपीसी अध्यक्ष धामी ने गलत बताया है।
धामी ने मामले की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के तहत शिरोमणि कमेटी गुरुद्वारा साहिबों और गुरुद्वारा अंगीठा साहिब अकालसर मस्तुआना के प्रबंधन की देखरेख करती है। इसे पंजाब सरकार ने सिख गुरुद्वारा एक्ट की धारा 7(3) के तहत 4 सितंबर 1964 को नोटिफाई किया था, जो कि एसजीपीसी मैनेजमेंट संपत्ति के लिए जिम्मेदार है।
धामी ने गुरुद्वारा अंगीठा साहिब अकालसर मस्तुआना के मामले की स्पष्ट करते हुए कहा कि 1966 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत अधिसूचित होने के बाद लाल सिंह और अन्य ने सिख गुरुद्वारा ट्रिब्यूनल में एक याचिका दायर की, जिसे 1973 में सिख गुरुद्वारा ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया। इसके खिलाफ लाल सिंह और अन्य ने 1976 में चंडीगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर की, जिसे उच्च न्यायालय ने 1984 में खारिज कर दिया। 1985 में, अधिसूचना संख्या 936 जीपीके माध्यम से सिख गुरुद्वारा अधिनियम की धारा 17 के तहत पंजाब सरकार द्वारा गुरुद्वारा साहिब मस्तुआना, अकाल सागर और अंगीठा साहिब को सिख गुरुद्वारा के अधीन संपत्ति घोषित किया गया है। सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 के नियम उन पर लागू होते हैं।
एडवोकेट धामी ने कहा कि शिरोमणि कमेटी क्षेत्र के संगत की भावनाओं की कदर करती है और शिरोमणि कमेटी ने 22 नवंबर 2022 को कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में निर्णय लिया था और पंजाब सरकार को लिखित बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सरकार ने इस मुद्दे पर कोई सार्थक पहल नहीं दिखाई और न ही कोई जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर सीएम मान मेडिकल कॉलेज बनाने को लेकर गंभीर हैं, इसलिए उन्हें कानूनी पहलू को समझकर शिरोमणि कमेटी से बात करनी चाहिए, ताकि इस मसले का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान किया जा सके।