अमृतसर। पंजाब के बिजली व लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि आप की सरकार में किसी भी दफ्तर में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने के बाद ईटीओ वीरवार को सचखंड श्री हरमंदिर साहिब और भगवान वाल्मीकि रामतीर्थ में नतमस्तक होने पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने प्रशासनिक व अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की और लोगों के नाम संदेश में कहा कि वे किसी भी दफ्तर में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत बेझिझक फोन नंबर 95012-00200 पर करें। इससे पहले अमृतसर पहुंचने पर पंजाब पुलिस की एक टुकड़ी ने उन्हें गार्ड आफ आनर दिया।
कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि वे खुद सरकारी विभाग में रहे हैं, तो लोगों की जरूरतों और मुश्किलों से बखूबी वाकिफ हैं। अधिकारियों को कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह का दबाव नहीं होगा और अधिकारियों को कानून के तहत काम करने की आजादी रहेगी। जिस तरह पंजाब के लोगों ने चुनावों में आप पार्टी को बड़ा फतवा दिया है, तो उससे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं, जो सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग के बिना पूरी नहीं की जा सकतीं।
उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि ध्यान रहे कि सरकारी दफ्तरों में लोग परेशान नहीं हों और उनके काम तय समय सीमा के भीतर किए जाएं। दफ्तरों में लोगों के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाए। डीसी गुरप्रीत सिंह खैहरा ने मंत्री को विश्वास दिलाया कि जिले के सभी अधिकारी और कर्मी सरकार की उम्मीद के मुताबिक हर लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यत्नशील रहेंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल, निगम कमिश्नर संदीप रिशी, एसएसपी देहाती दीपक हिलौरी, आरटीए सचिव अर्षदीप सिंह, एसडीएम राजेश शर्मा व अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
मंत्री ने फूड सप्लाई अधिकारियों को चेताया
गेहूं घोटाला व गेहूं आवंटन में गड़बड़ियां करने को लेकर अकसर चर्चा में रहने वाले पंजाब सरकार के फूड सप्लाई विभाग के अधिकारियों को कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने विशेष तौर पर चेताया। उन्होंने कहा कि गांवों और शहर में रियायती दाम पर बांटी जाने वाली गेहूं को पंच-सरपंचों या पार्षदों के घरों पर बांटने की बजाए किसी सरकारी दफ्तर में ही बांटे। उन्होंने कहा कि गेहूं की मात्रा प्रत्येक परिवार को उसके कोटे के मुताबिक मिलनी चाहिए न कि डिपो होल्डर की मर्जी के साथ।