मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेकते हुए सचखंड श्री हरमंदिर साहिब को जाने वाले रास्ते हेरिटेज स्ट्रीट पर स्थापित सभ्याचारक बुतों को वहां से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए।
मुख्यमंत्री की ओर से प्रदेश के सांस्कृतिक विभाग को दिए आदेश के बाद जिला प्रशासन ने इन बुतों को स्थापित करने के लिए स्थान ढूंढना शुरू कर दिया है। संभावना है कि ये बुत रामबाग में स्थापित किये जा सकते हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने डीजीपी दिकर गुप्ता को निर्देश दिया कि इन बुतों को तोड़ने वाले नौजवानों पर लगी धारा 307 पर पुनर्विचार किया जाये।
बता दें कि 15 जनवरी को रात कुछ सिख संगठनों के सदस्यों ने इन बुतों को तोड़ने का प्रयास किया था। जब बुत नहीं टूटे तो इन नौजवानों ने संगमरमर के बने बुतों के प्लेटफार्म को तोड़ दिया। इन बुतों को तोड़ने के बाद पैदा हुए बवाल के बाद कई सिख संगठन बुतों के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गए।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी इन बुतों को हटाने का समर्थन करते हुए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। एसजीपीसी के सीनियर उपाध्यक्ष राजिंदर सिंह मेहता की अगुवाई में बनी इस कमेटी ने चार दिन पहले डीसी शिवदुलार सिंह ढिल्लों के साथ बैठक कर इन बुतों को हटाने की मांग की थी।
कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि ये बुत अकाली-भाजपा सरकार के समय स्थापित किये गए थे। इनको लेकर नौजवानों में रोष था। नौजवानों द्वारा इन बुतों को तोड़ना जायज नहीं है, लेकिन उनकी भावनाओं को देखते हुए यह निर्णय किया गया है।