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Attari Border: भारत-पाक सीमा पर 42 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी डटी हैं बीएसएफ महिला प्रहरी, देश सेवा इनका सबसे बड़ा धर्म

Sun, 05 Jun 2022 04:12 PM IST
निवेदिता वर्मा रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

इस समय करीब 100 बीएसएफ महिला प्रहरी सीमा पर तैनात हैं। हथियारों से लैस, पैनी नजर ऐसी कि दुश्मन आंख उठाकर नहीं देख सकता। बीएसएफ की ये महिला प्रहरी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर समय तैयार रहती हैं।  
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सीमा पर तैनात बीएसएफ की महिला प्रहरी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर बेटियां चौकसी कर रही हैं। पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी में भी बीएसएफ की जांबाज प्रहरी कंटीली तारों के पास अपनी चौकस निगाह लगाए रहती हैं। लू के थपेड़ों के बीच बीएसएफ की महिला प्रहरियों के हौसले और जज्बे को कोई परास्त नहीं कर सकता।

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पंजाब में अटारी सीमा पर पहली बार बीएसएफ महिला प्रहरियों की तैनाती साल 2009 में की गई थी। तब इन्हें अटारी सीमा पर फेंसिंग के पार खेती के लिए जाने वाली महिलाओं की तलाशी के लिए लगाया गया था। मगर आज यह जांबाज प्रहरी देश की सीमा पर पुरुषों के बराबर हर समय ड्यूटी पर तैनात रहती हैं। अब पाकिस्तान से सटी सीमा पर हाथों में हथियार उठाए, सीमा की सुरक्षा करते दिखती हैं। 

यह महिला प्रहरी बार्डर पर नाइट पेट्रोलिंग ही नहीं करती बल्कि हर तरह की ड्यूटी और बीएसएफ के हर ऑपरेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम हो चुकी हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच देश के विभिन्न प्रदेशों में रहने वाली बेटियां अटारी सीमा पर ड्यूटी कर रही हैं। गर्मी में लू के थपेड़े हो या पारा 42 डिग्री के पार, सर्दी में हाड़ कंपा देने वाली ठंड और बारिश, या फिर तेज आंधियां, यह महिला प्रहरी सीमा पर पुरुषों की तरह पैदल या जीप में गश्त करती हैं।
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अटारी सीमा पर तैनात कांस्टेबल कमलेश कुमार, सीता रानी और सागरिका कहती हैं कि उन्होंने देश की सुरक्षा की जो शपथ ली है, उसे अंतिम सांस तक निभाएंगी। सोच समझकर ही बीएसएफ में आने का फैसला किया। बीएसएफ का हिस्सा बनने के बाद पता चला कि यहां महिलाओं का कितना सम्मान है। पहले सिर्फ आफिशियल, शैक्षणिक क्षेत्र में या नर्सिंग जॉब के लिए महिलाओं को रखा जाता है, लेकिन आज वे सीमा पर दुश्मन सैनिकों की आंखों में आंखें डाल ड्यूटी कर रहीं हैं। 

बचपन में चोर-सिपाही खेल खेलते कर लिया था सिपाही बनने का फैसला 

पंजाब की बलबीर कौर और लखविंदर कौर, जम्मू की काजल कुमारी और हरियाणा की प्रीती का कहना है कि बचपन में चोर-सिपाही का खेल खेलते-खेलते उन्होंने देश के सिपाही बनने का फैसला कर लिया था। शिक्षा के बाद बीएसएफ में जाने के लिए तैयारी में जुट गईं। परिवार वालों ने भी पूरा सहयोग दिया। उनका सपना पूरा हुआ और वे बीएसएफ का हिस्सा बन गईं। आज वर्दी पहन जब सीमा पर ड्यूटी करतीं हैं तो उन्हें अपने फैसले पर गर्व होता है। उनके गांव में भी लोग उन पर गर्व करते हैं।

रिट्रीट सेरेमनी का हिस्सा भी बनती हैं बीएसएफ की महिला प्रहरी

महिला जवान बलबीर कौर ने बताया कि अब अटारी सीमा पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी में भी महिला जवान शामिल होती हैं। यहां महिलाओं के छह ग्रुप हैं। रोजाना बारी-बारी से दो महिलाएं इसका नेतृत्व करती हैं। रिट्रीट के लिए बराबर कद वाला जोड़ा बनाया जाता है। अब तो पाकिस्तान की तरफ से भी महिलाएं रिट्रीट सेरेमनी की शुरुआत करने लगी हैं। रोजाना 15 से 20 हजार तक की संख्या में सैलानी इस सेरेमनी का आनंद उठाते हैं। शनिवार और रविवार को दर्शकों की 25 हजार तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि यह फील्ड बेटियों के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित है। 

विश्व में सिर्फ दो देशों के बीच होती है संयुक्त सेरेमनी

अमृतसर से 32 किमी की दूरी पर स्थित अटारी-वाघा बार्डर एक ऐसी जगह है जहां पहुंचते ही आपके अंदर देशप्रेम की भावना जागृत होने लगती है। वंदेमातरम, जय हिंद और भारत माता की जय के नारों से सैलानियों के दिलों में एक अलग ही तरह का अहसास आने लगता है। अटारी वाघा बॉर्डर पर आज जहां बीएसएफ और पाक रेंजर्स की रिट्रीट सेरेमनी देखने रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं। यहां 69 साल पहले ऐसा कुछ भी नहीं था। साधारण रूप से शुरू हुई यह परंपरा अब एक भव्य आयोजन का रूप ले चुकी है। 

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