भारत-पाकिस्तान सीमा पर बेटियां चौकसी कर रही हैं। पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी में भी बीएसएफ की जांबाज प्रहरी कंटीली तारों के पास अपनी चौकस निगाह लगाए रहती हैं। लू के थपेड़ों के बीच बीएसएफ की महिला प्रहरियों के हौसले और जज्बे को कोई परास्त नहीं कर सकता।
पंजाब की बलबीर कौर और लखविंदर कौर, जम्मू की काजल कुमारी और हरियाणा की प्रीती का कहना है कि बचपन में चोर-सिपाही का खेल खेलते-खेलते उन्होंने देश के सिपाही बनने का फैसला कर लिया था। शिक्षा के बाद बीएसएफ में जाने के लिए तैयारी में जुट गईं। परिवार वालों ने भी पूरा सहयोग दिया। उनका सपना पूरा हुआ और वे बीएसएफ का हिस्सा बन गईं। आज वर्दी पहन जब सीमा पर ड्यूटी करतीं हैं तो उन्हें अपने फैसले पर गर्व होता है। उनके गांव में भी लोग उन पर गर्व करते हैं।
महिला जवान बलबीर कौर ने बताया कि अब अटारी सीमा पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी में भी महिला जवान शामिल होती हैं। यहां महिलाओं के छह ग्रुप हैं। रोजाना बारी-बारी से दो महिलाएं इसका नेतृत्व करती हैं। रिट्रीट के लिए बराबर कद वाला जोड़ा बनाया जाता है। अब तो पाकिस्तान की तरफ से भी महिलाएं रिट्रीट सेरेमनी की शुरुआत करने लगी हैं। रोजाना 15 से 20 हजार तक की संख्या में सैलानी इस सेरेमनी का आनंद उठाते हैं। शनिवार और रविवार को दर्शकों की 25 हजार तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि यह फील्ड बेटियों के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित है।
अमृतसर से 32 किमी की दूरी पर स्थित अटारी-वाघा बार्डर एक ऐसी जगह है जहां पहुंचते ही आपके अंदर देशप्रेम की भावना जागृत होने लगती है। वंदेमातरम, जय हिंद और भारत माता की जय के नारों से सैलानियों के दिलों में एक अलग ही तरह का अहसास आने लगता है। अटारी वाघा बॉर्डर पर आज जहां बीएसएफ और पाक रेंजर्स की रिट्रीट सेरेमनी देखने रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं। यहां 69 साल पहले ऐसा कुछ भी नहीं था। साधारण रूप से शुरू हुई यह परंपरा अब एक भव्य आयोजन का रूप ले चुकी है।