हैंड ग्रेनेड और पिस्तौल के साथ गिरफ्तार बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के आतंकी अमृतपाल सिंह के कब्जे से मिले मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अगले एक दो दिनों में आरोपी के मोबाइल का डाटा पुलिस के पास पहुंच सकता है। मोबाइल से डाटा मिलने पर आगे की कड़ियां जुड़ेंगी।
वहीं दूसरी तरफ पुलिस 15 और 16 अगस्त की मध्यरात्रि घरिंडा थानाक्षेत्र से सुल्तानविंड इलाका के अमृतपाल सिंह और सैमी को गिरफ्तार किए जाने के बाद पंजाब में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम दिए जाने की बात सामने आई थी।
पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के बाद इनके कब्जे से दो हैंड ग्रेनेड, एक पिस्तौल, कारतूस और मैगजीन बरामद किए थे। आरोपी अमृतपाल, जो आतंकी संगठन बीकेआई के साथ संबंधित है, से की गई पूछताछ के बाद बटाला-धारीवाल के बीच गांव सुचेतगड़ से भी 4 और हैंड ग्रेनेड, 3 पिस्तौल, तीस कारतूस और छह मैगजीन बरामद किए। पुलिस आरोपियों के साथ जुड़े अन्य लोगों के लिंक तलाशने में लगी है, ताकि पंजाब में होने वाली किसी भी बड़ी आतंकी वारदात को रोका जा सके।
पुलिस द्वारा की गई जांच में सामने आया कि जेल से रिहाई के बाद बीकेआई का आतंकी गुरप्रीत सिंह उर्फ खालसा यूके में कहीं बैठ संगठन चला रहा है। यूके जाने से पहले वह सुल्तानविंड इलाका में बीकेआई संगठन से जुड़े आतंकी अमृतपाल सिंह के घर पर कई बार ठहरा था। खालसा के यूके जाने के बाद से ही अमृतपाल सिंह उसके लिए काम कर रहा था।
लोपोके थानाक्षेत्र के गांवों में चलाया जा रहा सर्च अभियान
पुलिस लोपोके क्षानाक्षेत्र के सीमांत गांवों में लगातार सर्च अभियान चला रही है। स्वतंत्रता दिवस से 24 घंटे पहले ही पंजाब पुलिस ने बेड़ेवाल गांव में ड्रोन के जरिये गिराए टिफिन बाक्स से एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के अलावा 2 हैंड ग्रेनेड, एक पिस्तौल, कारतूस और मैगजीन बरामद किए थे। संभावना जताई जा रही है कि लोपोके थानाक्षेत्र के गांव बेड़ेवाल में ड्रोन के जरिये फेंके गए टिफिन बम और भी कहीं पड़े हो सकते हैं।
अमृतपाल के मोबाइल से होंगे बड़े खुलासे : गुलनीत सिंह
एसएसपी अमृतसर देहाती गुलनीत सिंह ने बताया कि सुल्तानविंड इलाके का अमृतपाल सिंह बीकेआई का सक्रिय सदस्य है और यूके बैठे गुरप्रीत सिंह खालसा के लिए काम कर रहा था। अमृतपाल के कब्जे से मिले मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अगले एक दो दिनों में ही इसके मोबाइल का पूरा डाटा पुलिस के पास पहुंचने की उम्मीद है। उक्त डाटा के आधार पर ही बड़े खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि उससे पता चल सकेगा कि वह कौन-कौन से आतंकी संगठनों और सदस्यों के साथ संपर्क में था।