प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बिक्रम सिंह मजीठिया।
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शिरोमणी अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवारों के समर्थन में सर्वसम्मति बनाने के लिए खूंखार गैंगस्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए जिन पंचायतों में सर्वसम्मति करवाई गई है उनकी उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच करवाई जाए। इस के साथ ही चुनावों में टिकटों की बिक्री और यहां तक कि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए रिश्वत वसूली की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए। बिक्रम मजीठिया सोमवार दोपहर बाद अमृतसर में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
इस प्रेस कांफ्रेंस में मजीठिया के साथ पूर्व सरपंच दलबीर सिंह ढिलवां के भाई बलजिंदर सिंह भी मौजूद रहे। बलजिंदर सिंह ने कहा कि गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया पंचायत चुनाव को प्रभावित करने के लिए धमकियां दे रहा है। बलजिंदर ने खुलासा किया कि कैसे उनके उम्मीदवार को धमकाया गया। भगवानपुरिया के उम्मीदवार ने हवाई फायरिंग और उन्हें डराने के लिए उनकी गाड़ी भी रोकी।
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप
बलजिंदर सिंह ने कहा कि जब उन्होंने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी तो पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में एक व्यक्ति उनके घर आया और उनकी भगवानपुरिया से फोन पर बात करवाई। उसने बलजिंदर सिंह को कहा कि अगर उन्होंने रास्ते में आना जारी रखा तो उनका भी उनके भाई जैसा ही हाल होगा।
वीडियो दिखा कर किया खुलासा
मजीठिया ने कहा कि जग्गू भगवानपुरिया का सहयोगी बलविंदर, जिसे जेल की सजा सुनाई गई थी और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरदासपुर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था, वह साढ़े चार साल बाद जमानत पर बाहर आया हुआ है और वह जिले में सरेआम प्रचार कर रहा है, इस बात को साबित करने के लिए उन्होंने मीडिया के सामने एक वीडियो भी पेश किया। मजीठिया ने एक वीडियो भी दिखाया जिसमें आप के एक वरिष्ठ नेता जग्गू भगवानपुरिया के भाई को गांव भगवानपुर के सरपंच के रूप में उसे सर्वसम्मति से चुनने के बाद माला पहना रहा है।
सीबीआई जांच की मांग
मजीठिया ने आरोप लगाया कि चुनाव गैंगस्टरों का इस्तेमाल करने के अलावा आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने विपक्षी दल के समर्थित उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज करवाए हैं। गांव में जबरन सर्वसम्मति से पंचायत बनाकर करोड़ों रुपये इकट्ठे किए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह आप के पदाधिकारी ने चूल्हा टैक्स के लिए एनओसी जारी करने के लिए प्रति केस 50 हजार रुपये एकत्र किए, जो प्रति वर्ष सात रुपये था। उन्होंने मांग की इस भ्रष्टाचार की सीबीआई से जांच होनी चाहिए।