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Amritsar News: बहुजन समाज पार्टी लड़ना चाहती है जालंधर लोकसभा चुनाव

Thu, 06 Apr 2023 10:49 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
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अकाली दल के समक्ष रखा गठजोड़ के तहत सीट बसपा को देने का प्रस्ताव
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उम्मीदवार का फैसला अकाली दल के सुखबीर बादल और बसपा सुप्रीमो मायावती पर छोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। जालंधर लोकसभा उपचुनावों पर बसपा ने लड़ने का प्रस्ताव अकाली दल के पास रखा है। उधरए अकाली दल ने भी दोनों पार्टियों की हाल में ही हुई संयुक्त बैठक में बसपा को अकाली उम्मीदवार का समर्थन करने की दलील पेश की गई। अब फैसला हुआ है कि एक दो दिनों के भीतर अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और बसपा सुप्रीमो बहन मायावती आपस में बातचीत कर उम्मीदवार का फैसला लेंगे।
इसके साथ ही बसपा में आने वाले चुनावों को मुख्य रखकर गांव चलो अभियान शुरू करने का फैसला लिया हैए ताकि गांव स्तर पर अपना वोट बैंक दोबारा एकजुट किया जाए और भविष्य में अकाली दल से गठजोड़ के तहत अधिक से अधिक सीटें हासिल की जा सकें।
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सूत्रों के अनुसार अकाली दल का एक हिस्सा जालंधर का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहता, क्योंकि अकाली दल का इस सीट पर अधिक आधार नहीं है। जबकि दूसरा हिस्सा चाहता है कि सीट बसपा को दे दी जाए।
अकाली दल के कुछ नेताओं ने लीडरशिप को सुझाव दिया है कि जालंधर सीट पर चाहे अकाली दल का आधार नहीं है। अगर अकाली दल सीट लड़ता है और बसपा का कैडर सहयोग करता है तो भविष्य के लिए जालंधर सीट पर अकाली दल अपना आधार बनाने में सफल हो सकता है। वहां उसे अकाली दल को दलित कैडर भी बड़ी संख्या में मिल सकता है। बुधवार को बसपा के प्रदेश केंद्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल के नेतृत्व में बसपा की राज्यस्तरीय मंथन बैठक हुई, जिसमें लगातार छह घंटे तक मंथन हुआ। बैठक के दौरान राज्य की 117 विधानसभाओं में संगठन की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण चर्चा हुई। वहीं, जालंधर लोकसभा सीट पर बसपा को अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए जोरदार दावेदारी पेश करने पर भी विचार किया गया।
यह भी फैसला हुआ कि बसपा-शिअद जालंधर उपचुनाव गठबंधन के तहत लड़ेगी, जिसका फैसला बसपा अध्यक्ष बहन मायावती और शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल मिलकर करेंगे। दोनों पार्टियों के कैडर और नेतृत्व दिल खोलकर समर्थन करते हैं तो जीत हासिल होगी। इस दौरान बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि अकाली दल के साथ बसपा का गठबंधन लंबे समय तक जारी रहेगा और इसे ध्यान में रखते हुए वे संगठन को मजबूत करेंगे।
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पार्टी के वरिष्ठ नेता व पार्टी के पूर्व राज्य अध्यक्ष अवतार सिंह करीमपुरी कहते हैं कि अकाली दल और बसपा की सांझी बैठक के दौरान बसपा ने अपना उम्मीदवार खड़ा करने का पक्ष रखा था, परंतु अकाली दल भी चाहता है कि चुनाव वे ही लड़ें। बसपा का पक्ष मजबूत है। बस अंतिम फैसला सुखबीर सिंह बादल और बहन मायावती को करने के लिए कह दिया गया है।
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