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अमृतसर : अपनों ने छोड़ा पर जुड़वा भाइयों ने नहीं मानी हार, कहा- अलग इंसान नहीं हैं हम

Fri, 31 Dec 2021 05:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर

सार

धड़ से जुड़े भाइयों ने पढ़ाई की और नौकरी भी पाई। जिंदगी को खतरा बता डॉक्टरों ने नहीं किया था अलग। माता-पिता ने छोड़ दिया था जुड़वा भाइयों को। ट्र्स्ट की मदद से सुधारी जिंदगी।
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सोहना-मोहना... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जब इरादे बुलंद हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। ये कहानी अमृतसर के सोहना-मोहना पर सटीक बैठती है। दोनों जुड़वा भाइयों का शरीर धड़ से जुड़ा होने के कारण उनके माता-पिता ने भले ही छोड़ दिया पर इन दोनों ने हार नहीं मानी। एक दूसरे का सहारा बने ये भाई जिंदगी जीने के साथ ही आज सरकारी नौकरी भी कर रहे हैं।

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जुड़वा भाइयों को ऑपरेशन करके अलग करने में जान को काफी खतरा था, इसलिए डॉक्टरों ने इन्हें अलग नहीं किया और अमृतसर के पिंगलवाड़ा चैरिटेबल ट्रस्ट को सौंप दिया। दो महीने के सोहना-मोहना को ट्रस्ट में लाया गया था। इसके बाद यही ट्रस्ट इनका घर बन गया। 

10वीं तक पढ़ाई और आईटीआई की ट्रेनिंग के बाद पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन में इनकी नौकरी लग गई है। इन्हें हर महीने 20,000 रुपये मिलेंगे। दरअसल, सोहना को काम मिला है और मोहना साथ में मदद करता है। दोनों भाई नौकरी का श्रेय भी ट्रस्ट को देते हैं।
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पिंगलवाड़ा ट्रस्ट की मुखिया डॉक्टर इंदरजीत कौर बताती हैं, ‘बहुत सी संस्थाएं इन्हें लेना चाहती थीं। लेकिन अस्पताल ने हमें दे दिया। जब ये बड़े हुए तो किशोर हॉस्टल में चले गए। मानसिक रूप से बहुत समझदार थे। इसलिए आज अपने पैरों पर खड़े हैं।’ 


हम अलग इंसान नहीं...

  • 14 जून 2003 को नई दिल्ली के सुचेता कृपलानी अस्पताल में दोनों जुड़वां भाइयों का जन्म हुआ। सोहना-मोहना कहते हैं, ‘हम कोई अलग इंसान नहीं हैं, हम सब की तरह ही हैं। हमने सपने में नहीं सोचा था कि इतना अच्छा स्टाफ मिलेगा। सरकार से हम सरकार चाहते हैं कि बेरोजगारों की मदद करे।’
  • पीएसपीसीएल के सब स्टेशन जूनियर इंजीनियर रविंदर कुमार कहते हैं, ‘सोहना-मोहना बिजली के उपकरणों की देखभाल में मदद करते हैं। इनके पास काम का अच्छा अनुभव भी है।’इन दोनों भाइयों की जिंदगी लाखों लोगों के लिए प्रेरण है जो अपनी कमजोरियों का रोना रोकर हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाते हैं।
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