19 नवंबर को रद्द हुई एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी की बैठक अब 26 नवंबर को होगी। इस बैठक में जत्थेदारों को उनके पदों से हटाने के मुद्दे पर विचार नहीं किया जाएगा।
एसजीपीसी अध्यक्ष अतवार सिंह मक्कड़ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि 26 नवंबर की बैठक में जत्थेदारों को बदलने पर विचार नहीं होगा।
मक्कड़ ने कहा कि 11 नवंबर को सरबत खालसा के घोषित किए गए जत्थेदार ने जब संदेश पढ़ा तो उस दौरान हुई हुल्लड़बाजी की जांच सब कमेटी ने शुरू कर रही है। उन्होंने कहा कि सारे मामले की जांच होगी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 19 नवंबर की बैठक क्यों रद्द की गई है, इस संबंध में एसजीपीसी का कोई भी पदाधिकारी व सदस्य कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
डेरा मुखी को माफी और बाद में सरबत खालसा में तीन जत्थेदारों को उतारे जाने के बाद से एसजीपीसी की सिख कौम में काफी किरकिरी हो रही थी।
इसी को मुख्य रख एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी ने जत्थेदारों को बदलने के लिए 19 नवंबर को बैठक बुलाई थी, लेकिन अकाली दल और एसजीपीसी के मुताबिक पंजाब में अभी वैसे हालात नहीं है, जैसी उनको उम्मीद थी।
बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब के नए जत्थेदार की नियुक्ति भी की जानी थी। वहीं जिन कथावाचक का नाम जत्थेदार बनाने के लिए चर्चा में था। उन्होंने भी इस पद को लेने से इंकार कर दिया है।
एसजीपीसी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार कथा वाचक के इंकार के बाद एसजीपीसी काफी दुविधा में है। ऐसा कोई नाम एसजीपीसी को नहीं मिल रहा है, जो कमेटी के फ्रेम में फिट बैठता हो। चर्चा है कि इसी लिए इस बैठक को रद्द किया गया है।