युवाओं को हथियार रखने के लिए प्रेरित कर रहा था। अमृतपाल की फोर्स में भर्ती होने के लिए कई युवा तैयार थे, लेकिन अमृतपाल चाहता था कि उसके साथ समर्पित व वफादार युवा ही जुड़ें, क्योंकि पहले कुछ युवा अमृतपाल को धोखा भी दे चुके थे। इनमें से वरिंदर सिंह भी एक था, जिसने अमृतपाल और उसके साथियों के खिलाफ पहला मामला दर्ज करवाया था।
अमृतपाल अपने साथ पक्के तौर पर जुड़ने वाले युवाओं के साथ खुद अकेले में बातचीत करता था। करीब 20 युवाओं के साथ अमृतपाल दो बार मीटिंग कर चुका था। अभी उनके साथ एक फाइनल बातचीत होनी बाकी थी।
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उधर, अमृतपाल सिंह की तलाश में पंजाब पुलिस की टीमें पीछा कर रही हैं, लेकिन उसे बचाने के लिए पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी मदद में जुटी हुई। पुलिस को अंदेशा है कि अमृतपाल को आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा के जानकारों के यहां पाक की खुफिया एजेंसी उसे ठहराने का इंतजाम कर सकती है।
ऐसे में रिंदा और अन्य गैंगस्टरों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी पुलिस नजर रख रही है। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों में ग्रामीण चौकस कमेटियों को भी अलर्ट रहने की हिदायत दी है।
खालिस्तान की मांग करने वाले अमृतपाल पर जैसे ही कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ ठीक उसी दरम्यान अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और दुबई से अपने देश में माहौल को बिगाड़ने के लिए ट्विटर अकाउंट बनाए जाने लगे। खुफिया एजेंसियों के इनपुट से मिली जानकारी के मुताबिक, 15 मार्च से लेकर 19 मार्च तक 2559 नए टि्वटर अकाउंट बनाए गए। जो न सिर्फ अमृतपाल मामले में हैशटैग का अभियान चला रहे थे, बल्कि माहौल को बिगाड़ने के लिए कई नफरती ट्वीट्स को रिट्वीट कर रहे थे। इसके अलावा कई ट्विटर अकाउंट ऐसे भी पाए गए हैं जो 2020 के किसान आंदोलन के दौरान भी माहौल खराब कर रहे थे और अब भी वही अकाउंट माहौल खराब करने में लगे हैं।
बाबा बकाला तहसील के गांव जल्लुपर खेड़ा का अमृतपाल सिंह कपूरथला के बहु तकनीकी कॉलेज का ड्रॉप आउट है। उसके बाद वह दुबई में जाकर ट्रक ड्राइवर बना और ट्रांसपोर्ट का कारोबार आगे बढ़ाया। जब वह वारिस पंजाब का प्रमुख बता तो राजनीतिक हलचल पैदा हुई और खुफिया विंग भी जागरूक हुआ। कुछ दिनों में वह राजनीति का केंद्र बन गया। जितनी तेजी उसका ग्राफ चढ़ा, उससे तेज गति से नीचे गिरा। वहीं, अब पुलिस का सबसे बढ़ा वाटेंड है। 80 हजार पुलिस कर्मी उसके पीछे है। लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग पुलिस नहीं लगा पाई है।