युवाओं को पेन किलर व अन्य ताकत की दवाएं दी जाती थीं। एक युवक चार-पांच दिन तक गहन निगरानी में रखा जाता था। उन्हें अमृतपान करवाया जाता था और भविष्य में नशा न करने की सख्त हिदायतें भी दी जाती थी।
कौम व पंथ के लिए कुर्बानी की बात
नशा छोड़ने के लिए आने वाले युवाओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर एकेएफ से साथ जोड़ा जाता था। उनको कौम व पंथ के लिए कुर्बानी के लिए तैयार किया जाता था, ताकि आने वाले समय में इन युवाओं को मानव बम के रूप में उपयोग किया जा सके।
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बताया जा रहा है कि करीब 22 युवाओं को इसके लिए मानिसक रूप में तैयार किया जा रहा था। एकेएफ के साथ 220 युवाओं को जोड़ा जा चुका था। इसमें उन्हीं युवाओं को साथ मिलाया जाता था, जो अमृतधारी हों और उनके पास अपना लाइसेंसी हथियार हो।
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अमृतपाल के ''खालसा वहीर'' का हिस्सा रहे एक युवक ने बताया कि वहीर में 35 के करीब क्वालीफाइड डाक्टर भी शामिल थे। ये पंजाब के अलग-अलग इलाकों से नशा सेवन करने वाले युवाओं का नशा छुड़ाने का काम करते थे। इमरजेंसी में इलाज करने भी पहुंच जाते थे। कई बार फोन पर ही दवाएं बता दिया करते थे।