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पीपीई किट घोटाले में कार्रवाई, अमृतसर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को हटाया

Thu, 02 Jul 2020 12:03 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, अमृतसर
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सांकेतिक तस्वीर
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कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के बचाव के लिए खरीदी गई किटों में हुए कथित घोटाले में जांच शुरू होते ही 24 घंटे के भीतर पंजाब सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा को प्रिंसिपल पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर मेडिकल कॉलेज स्थित कैंसर विभाग के प्रभारी डॉ. राजीव देवगण को प्रिंसिपल के पद पर नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। सरकार ने डॉ. सुजाता शर्मा को उनके पुराने विभाग गायनी वॉर्ड के प्रभारी की जिम्मेदारी सौंप दी है।
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सरकार ने मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल की जिमेदारी निभा रही डॉ. वीणा चतरथ को भी हटा दिया है। डॉ. वीणा चतरथ को दोबारा एनेस्थीसिया विभाग भेज दिया गया है। वाइस प्रिंसिपल के पद की जिम्मेदारी डॉ. जगदेव सिंह कुलार को सौंपी गई है। मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. शिवचरण को मेडिकल कॉलेज से हटाकर पटियाला सरकारी मेडिकल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

पीपीई किट्स की खरीद में हुए कथित घोटाले के बाद मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग की काफी किरकिरी हो रही थी। सांसद गुरजीत औजला ने कोरोना वायरस के संकट में किट व अन्य उपकरण खरीदने के लिए मेडिकल कॉलेज को एक करोड़ की राशि जारी की थी। जिसमें से दो हजार किट्स 41 लाख 43 हजार रुपये में खरीदी गईं थी।
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मामले में भ्रष्टाचार की भनक लगने पर प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे। जांच का जिम्मा पुड्डा की प्रशासक डॉ. पल्लवी को सौंपा गया है। डॉ. पल्लवी ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज व गुरुनानक देव अस्पताल के बीस डॉक्टरों को तलब कर पूछताछ की थी। इस दौरान यह तथ्य सामने आए कि किट्स घटिया किस्म की थीं। बुधवार को मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग ने अचानक आर्डर जारी कर प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा को हटा दिया।

इन आदेशों में प्रिंसिपल पद से हटाने की वजह तो नहीं लिखी गई, लेकिन चर्चा है कि पीपीई किट्स की खरीद की डिमांड डॉ. सुजाता शर्मा ने भेजी थी। दूसरी तरफ मेडिसिन विभाग के डॉ. शिवचरण इस वक्त कोरोना वॉर्ड की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने ही पीपीई किट्स के घोटाला की संभावना व्यक्त करते हुए आरोप प्रत्यारोप किए थे। उन्हें भी बदलकर पटियाला भेजा गया है। कोरोना काल में डॉ. शिवचरण का तबादला होने से मेडिसिन विभाग के डॉक्टर स्तब्ध हैं।
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बैठक के बाद ही डॉ. सुजाता शर्मा को प्रिंसिपल पद से हटाने की रूपरेखा तय हो गई थी

बता दें कि 25 जून को सर्किट हाउस में मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग के मंत्री ओमप्रकाश सोनी, मुख्यमंत्री के हेल्थ एडवाइजर केके तालवाड़ ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से बैठक की थी। इसमें कोरोना के साथ साथ पीपीई किट्स का मामला भी उछला था। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद ही डॉ. सुजाता शर्मा को प्रिंसिपल पद से हटाने की रूपरेखा तय हो गई थी।

जांच अधिकारी ने पांच कर्मचारियों के बयान दर्ज किए
पीपीई किट्स घोटाले की जांच कर रही पुड्डा प्रशासक डॉ. पल्लवी ने बुधवार को मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ व दर्जा चार कर्मचारियों को जांच में शामिल किया। उन्होंने पांच कर्मचारियों के बयान कलमबंद किए। डॉ. पल्लवी ने कर्मचारियों से पूछा कि क्या किट्स खराब थीं? क्या यह फट जाती थीं? दर्जा चार कर्मचारी यूनियन के प्रधान नरिंदर कुमार ने डॉ. पल्लवी से कहा कि घटिया क्वालिटी की किट्स के बारे में उन्होंने मेडिसिन विभाग के मुखी, प्रिंसिपल व कोरोना के नोडल आफिसर को लिखित शिकायत की थी। नर्सिंग स्टाफ ने भी किट्स के घटिया होने की बात कही।

डॉ. राजीव देवगन ने संभाली प्रिंसिपल की जिम्मेदारी
सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थि त कैंसर विभाग के प्रभारी डॉ. राजीव कुमार देवगन ने बुधवार को प्रिंसिपल पद का कार्यभार संभाल लिया। डॉ. देवगन कैंसर स्पेशलिस्ट हैं और उन्होंने टाटा मेमोरियल मुंबई व अमेरिका से कैंसर का अध्ययन किया हैं। डॉ. देवगन ने कहा कि वर्तमान में बड़ी चिंता कोरोना वायरस से है। कोरोना को लेकर रोजाना नई गाइडलाइन जारी हो रही है। हमारा ध्यान इसी पर है। एक उत्तर में उन्होंने का कि पीपीई किट्स की खरीद मामले में वह कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि यह अभी जांच के अधीन है।

मेरा प्रयास रहेगा कि कॉलेज व अस्पताल के स्टाफ के सहयोग से मरीजों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की इमारत इसी वर्ष बनकर तैयार होनी थी, लेकिन कोरोना की वजह से इसके निर्माण में कुछ और वक्त लग सकता हैं। कोरोना संकट में भी मेडिकल कॉलेज का कैंसर विभाग एक दिन भी बंद नहीं हुआ। कैंसर मरीजों की ओपीडी व रेडिएशन की प्रक्रिया निरंतर जारी रही।
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