विशाल भव्य नगर कीर्तन सजाया, श्रद्धालुओं ने पूरे हर्षोउल्लास से मनाया बाबे का विवाह
संवाद न्यूज एजेंसी
बटाला। पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी और बीबी सुलखनी जी का 539वां विवाह पर्व शुक्रवार को बटाला में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। गुरु नानक देव जी सुल्तानपुर लोधी से बरात लेकर बटाला पहुंचे थे, जहां उनका विवाह बीबी सुलखनी से हुआ था। इस पर्व को समर्पित सिख संगत के सहयोग से एक विशाल नगर कीर्तन निकाला गया।
शुक्रवार को गुरुद्वारा डेहरा साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का भोग डाला गया। इसके बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी साहिब में सुशोभित कर पांच प्यारों की अगुवाई में नगर कीर्तन आरंभ हुआ। इमें स्थानीय संगत के साथ सुल्तानपुर लोधी और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु शामिल हुए। रास्ते में विभिन्न संगठनों ने पांच प्यारों को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। पालकी साहिब के आगे गतका पार्टी के खिलाड़ी और निहंग सिंहों ने युद्ध कला का प्रदर्शन किया। करीब 100 लोग, जिनमें महिलाएं भी थीं, नंगे पांव पालकी के आगे झाड़ुओं से रास्ते की सफाई कर रहे थे। नगर कीर्तन के दौरान जगह-जगह लंगर और ठंडे जल के स्टॉल लगे थे। बटाला के सभी गुरुद्वारों को सजाया गया था। एसजीपीसी सदस्य जत्थेदार गुरिंदरपाल सिंह गोरा ने संगत को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में भीड़
शुक्रवार सुबह से ही ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लाखों श्रद्धालु कच्ची कंध के दर्शन करने को उत्सुक थे, जो अब शीशे के फ्रेम में सुरक्षित है। सुबह करीब तीन बजे से ही गुरुद्वारा कंध साहिब में संगत का तांता लगना शुरू हो गया था। गुरुद्वारा साहिब के आसपास सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
पर्व का माहौल और सुरक्षा व्यवस्था
विवाह पर्व को लेकर बटाला शहर खचाखच भरा हुआ था, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शामिल थे। सड़कों के किनारे रागी, ढाडी और कविशर गुरु नानक देव जी के जीवन और आदर्शों की जानकारी दे रहे थे। मेले के दौरान बच्चों, बड़ों और महिलाओं ने झूलों पर आनंद लिया। पुलिस प्रशासन लोगों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह मुस्तैद था, चप्पे-चप्पे पर पुलिस कर्मी तैनात थे।