कोरोना और लॉकडाउन की वजह से अटारी-वाघा बॉर्डर के एंट्री गेट बंद कर देने से सीमा के उस पार बीते तीन महीनों से फंसे 748 भारतीयों में से 250 भारतीय गुरुवार को वतन लौट आए। इनमें अधिकतर जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थी हैं, जो पाकिस्तान के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने गए थे। लॉकडाउन के दौरान जम्मू-कश्मीर के 402 नागरिक पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में फंस गए हैं। बाकी नागरिक शुक्रवार को दूसरे चरण में वतन लौटेंगे।
पाकिस्तान वाघा सीमा पर पहुंचे इन जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों को अटारी भेजने से पहले पाकिस्तान रेंजर व सीमा शुल्क अधिकारियों ने इनके दस्तावेजों की जांच की। विद्यार्थियों को अटारी बॉर्डर से इंटरग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) में पहुंचाया गया। वहां तैनात छह डॉक्टरों वाली मेडिकल टीमों ने उनकी स्क्रीनिंग की।
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इन नागरिकों को अपने घरों तक पहुंचाने के लिए दो प्रोटोकॉल अधिकारी आमिर चौधरी व नदीम उमर को जिम्मेदारी दे रखी थी। जम्मू-कश्मीर राज्य परिवहन की दस बसों के साथ अटारी सड़क सीमा पर पहुंचे इन अधिकारियों के अनुसार बसों को जम्मू बस अड्डे में सैनिटाइज कर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि बसें इन सभी को लखनपुर तक ले जाएंगी। वहां एक बार फिर इनकी स्क्रीनिंग होगी। उसके बाद ही प्रशासन घरों को भेजेगा।
एसडीएम शिव राज बल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान से लौट रहे इन भारतीय नागरिकों में जो भी अमृतसर में क्वारंटीन के लिए रुकेगा, उसको पांच दिन के बाद कोरोना टेस्ट रिपोर्ट के साथ अपने राज्य जाने दिया जाएगा।
शुक्रवार को पाकिस्तान से भारतीय नागरिकों में गुजरात के 70, महाराष्ट्र से 61, उत्तर प्रदेश से 46, पंजाब से 36, राजस्थान 38, दिल्ली से 26, मध्यप्रदेश से 15, हरियाणा से 14, तेलंगाना से 11, कर्नाटक और चंडीगढ़ से छह- छह, छत्तीसगढ़ से 5, तमिलनाडु से चार, पश्चिम बंगाल से तीन, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से दो-दो नागरिक लौट रहे हैं।