मछुआरों की रिहाई कराने की उम्मीद लेकर पाकिस्तान से आया दल
पाकिस्तान में 392 और भारत की जेल में 106 मछुआरे हैं कैद
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। पाकिस्तानी तथा भारतीय समंदरों से पकड़े जाने वाले दोनों मुल्कों के मछुआरों की रिहाई और गिरफ्तारी के वक्त ही वापसी कराने के लिए पाकिस्तान से पूर्व जज जस्टिस नासिर असलम जाहिद की अगुवाई में चार लोगों का दल वीरवार को अटारी बार्डर से भारत पहुंचा। दल में हया ईमान जाहिद, अल्ताफ खौसो, करामत अली तथा काबिल साकी शामिल है। अटारी बार्डर पर इनको लेने के लिए फोकलोर रिसर्च अकादमी के प्रधान रमेश यादव तथा साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन के राजिंदर सिंह रूबी पहुंचे। जस्टिस जाहिद ने बताया कि इस वक्त पाकिस्तान की जेल में 392 भारतीय मछुआरे तथा भारत की जेल में 106 मछुआरे कैद हैं, जिनकी सजाएं पूरी हो चुकी हैं। दोनों तरफ इन लोगों की लाखों रुपये की कश्तियां जब्त हैं, यह कबाड़ बन चुकी हैं। उनका कहना है कि पूरे गांव के मछुआरे पैसा इकट्ठा करके इनकों बनवाते हैं, लेकिन पकड़ लिए जाने के कारण इनकी रोजी रोटी दांव पर लग जाती है।
अब काम नहीं कर रहा कमीशन : जाहिद
हया ईमान जाहिद का कहना है कि पहले इन मछुआरों की रिहाई के लिए दोनों मुल्कों के चार-चार जजों का इंडो-पाकिस्तान ज्वाइंट कमीशन बना था, जो अब काम नहीं कर रहा। वर्तमान में हालत ये हैं कि दोनों तरफ मछुआरे पकड़े जाने के बाद वर्षों जेलों में पड़े रहते हैं और इनके परिवार भुखमरी की कगार पर आ जाते हैं। 28 अगस्त को वह खुद कराची की जेल में मछुआरों से मिलने गई थीं। मछुआरों ने आपबीती सुनाते हुए अपील की कि उनकी रिहाई की कोशिश करें। उनका मानना है कि पाकिस्तान में नई सरकार आई है औैर वह ऐसे मसलों को लेकर गंभीर है, अब देखना यह है कि भारत सरकार कितना सहयोग करती है।