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जंग से पहले ही आम आदमी पार्टी का सरेंडर

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जंग से पहले ही आम आदमी पार्टी का सरेंडर
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नरोट जैमल सिंह काउंसिल के चुनाव में आप ने नहीं खेली बाजी
कांग्रेस-भाजपा और निर्दलीय में होगा मुकाबला
जितेंद्र शर्मा।
पठानकोट।
जिले के हलका भोआ में नई बनी नरोट जैमल सिंह नगर काउंसिल में 17 दिसंबर को होने वाले पहले चुनावों में आम आदमी पार्टी ने जंग के मैदान में उतरने से पहले ही सरेंडर कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने यहां पर चुनावी मैदान में अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है। आम आदमी पार्टी द्वारा काउंसिल के चुनावी मैदान में न उतरने से यह साफ हो गया है कि माझा में गिरते पार्टी के ग्राफ को खुद आम आदमी पार्टी भी अब समझ चुकी है।
सूबे में फरवरी महीने में हुए विधानसभा चुनावों में चाहे ही नयी पार्टी आम आदमी पार्टी अकाली-भाजपा से आगे निकल गई। लेकिन माझा में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। जिला पठानकोट के तीनों विधानसभा हलकों में से एक पर भी आम आदमी पार्टी को जीत मिलना तो दूर की बात पार्टी के प्रत्याशियों की जमानत भी नहीं बच पाई थी। इसके बाद गुरदासपुर लोकसभा हलके के उपचुनाव में भी आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी का प्रदर्शन खराब रहा था। इसके बाद अब जिले के हलका भोआ में नई बनी नगर काउंसिल नरोट जैमल सिंह के पहले चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
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अन्य पार्टियों की तरह आप ने दिलचस्पी नहीं दिखाई
जिस तरह से अक्तूबर में हुए गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव हर पार्टी के लिए अहम था। उसी प्रकार सूबे के कई जिलों में हो रहे निकाय चुनाव भी हर पार्टी के लिए अहम हैं। लेकिन जिला पठानकोट के हलका भोआ की नई नगर काउंसिल नरोट जैमल सिंह के चुनाव में बाकि पार्टियों की तरह आप ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। हालांकि सूबे के कई अन्य निगमों में आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ रही है। कयास लगाये जा रहे हैं कि आम आदमी पार्टी को जिले में पहले से ही गिर चुके अपने ग्राफ के नरोट जैमल सिंह काउंसिल चुनाव के बाद और भी गिरने का डर है। इसीलिए पार्टी ने नरोट जैमल सिंह नगर काउंसिल चुनाव से दूरी ही बनाई हुई है।
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तो 2020 में होगा असर .....
नगर काउंसिल नरोट जैमल सिंह चुनाव से दूरी बनाकर खुद की साख बचाने की सोच रही आम आदमी पार्टी को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार लोग खुद को निकाय चुनावों से ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। इन चुनावों में लोगों के बीच जाने वाले नेताओं को पॉलिटिकल फायदा जरूर मिलता है। लेकिन आप द्वारा दूरी बनाने से चाहे पार्टी खुद की साख बचाने की सोच रही है लेकिन इसका खामियाजा आप को आगामी निकाय चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। बता दें कि साल 2020 में जिले में सबसे अहम नगर निगम पठानकोट और फिर नगर काउंसिल सुजानपुर के चुनाव भी होने हैं।
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