मोगा में रैली को संबोधित करते पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल।
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पंजाब में फिर से सत्ता पर काबिज होने की लालसा को लेकर पिछले कई माह से खामोश बैठे राजनीति के बाबा बोहड़ पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने मोगा के उसी गांव किली चहलां में शिअद की रैली कर 2022 के चुनाव के लिए बिगुल बजा दिया है, जहां से लगातार चुनाव से पहले प्रचार की शुरुआत करते हैं। अकाली इस गांव को अपने लिए शुभ मानते हैं।
1996 में पूर्व मुख्यमंत्री बादल ने किली चहलां में रैली कर शिअद के चुनाव प्रचार का बिगुल बजाया था तो 1997 में शिअद ने प्रदेश की सत्ता संभाल ली थी। जब 2002 के चुनाव आए तो उससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री बादल ने किली चहलां से चुनाव प्रचार की शुरुआत नहीं की। उस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
2007 में जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे तो उसकी शुरुआत के लिए शिअद ने फिर से 1996 वाली रैली का इतिहास दोहराते हुए किली चहलां में रैली की। इसके बाद शिअद ने लगातार दो बार 2007 और 2012 में चुनाव जीत कर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा जमाया। दस वर्ष सत्ता संभालने के बाद फिर से पूर्व मुख्यमंत्री बादल ने 2002 वाली गलती को दोहराया और 2017 में किली चहलां से शिअद के लिए चुनाव प्रचार का बिगुल नहीं बजाया। असर दिखा और 2017 में अकालियों को हार का सामना करना पड़ा था। अब फिर से अकाली दल ने 2022 के चुनाव के लिए किली चहलां की धरती पर रैली कर चुनाव बिगुल बजाया है।
किली चहलां से प्रचार की शुरुआत को शुभ मानते हैं अकाली
शिरोमणि अकाली दल बादल अपने लिए किली चहलां की धरती को शुभ मानकर चलता है। इसके कारण शिअद ने मंगलवार को फिर से किली चहलां गांव के स्थान पर रैली कर चुनाव का बिगुल बजाया है। इस बारे में खुद बडे़ बादल और सुखबीर बादल कह चुके हैं। गांव किली चहलां के बारे में माना जा रहा है कि जो भी राजनीतिक दल अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत इस गांव से करता है, वो सबको पराजित कर सत्ता संभालने में कामयाब होता है। यही मुख्य कारण है कि मंगलवार को शिअद एवं बसपा के सभी छोटे-बडे़ नेता इस गांव से 2022 चुनाव में जीत हासिल करने का वरदान लेने के लिए रैली करने पहुंचे थे।