पंजाब रोडवेज के ठेका कर्मियों ने की हड़ताल।
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पंजाब में पीआरटीसी और पनबस में ठेके पर काम कर रहे लगभग 75 सौ मुलाजिम मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इससे प्रदेश भर में चलने वाली लगभग 25 सौ बसों के पहिए थम गए। यूनियन की इस हड़ताल के चलते सरकार के खजाने को हर दिन चार करोड़ रुपये का घाटा होगा। कांट्रेक्ट यूनियन नेताओं का साफ कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करेंगी वह इसी तरह अनिश्चितलकालीन हड़ताल पर रहेंगे।
कच्चे मुलाजिमों की हड़ताल के कारण बस डिपो में सरकारी और निजी किसी बस को अंदर नहीं घुसने दिया गया है। बुधवार को कच्चे मुलाजिम मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। हालांकि हड़ताल न हो, इसके लिए दबाव बनाने के लिए पुलिस ने कई जगह पर एफआईआर भी दर्ज की है। लेकिन यूनियन नेताओं का साफ कहना है कि वह इससे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, वह अपना संघर्ष इसी तरह जारी रखेंगे। मंगलवर को हड़ताल के चलते लुधियाना बस डिपो के मेन गेट पर यूनियन नेताओं ने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
यूनियन नेता रेशम सिंह ने बताया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने पर सबसे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने का आश्वासन दिया था। लेकिन कुछ नहीं हो सका। छह सितंबर को नए परिवहन मंत्री राजा वड़िंग ने उन्हें दोबारा पक्का करने का आश्वासन दिया, 12 सिंतबर को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पक्का करने का भरोसा दिया कि 20 दिन में सभी को पक्का कर दिया जाएगा।
इसी दौरान सरकार एक एक्ट ले आई, इसके अनुसार कोई मुलाजिम पक्का नहीं हो सकता है। जबकि सरकार ने नगर निगम और अन्य संस्थाओं को इस एक्ट से दूर रखा है। 22 नवंबर को एक बार फिर परिवहन मंत्री कैबिनेट की बैठक में पक्का करने का आश्वासन दे डाला। कैबिनेट की बैठक में उन्हें पक्का करने का कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया। आखिरकार उन्हें अपनी मांगों को लेकर मैदान में उतरना पड़ा है। आठ दिसंबर को पंजाब के 27 बसों डिपो के कच्चे मुलाजिम यूनियन के बैनर तले सीएम आवास का घेराव करेंगे।