हेमकुंड साहिब की यात्रा पर गया मुक्तसर के आठ युवाओं का एक दल अभी तक गोविंदघाट के पास के जंगलों में फंसा मदद का इंतजार कर रहा है।
इन युवाओं के साथ फंसे नरिंदर ने फोन पर बताया कि यात्रा पर जाते वक्त जहां हसीन वादियां थीं, वहीं अब हर जगह मौत का खौफनाक मंजर हैं।
उनके साथ 500 और श्रद्धालुओं का जत्था इस जंगल में सात दिन से फंसा है। 13 किलोमीटर वापस गोविंद धाम लौटने की अब किसी की हिम्मत नहीं है और आगे सड़क और पुल ध्वस्त हैं।
गुरुद्वारा कमेटी से मदद न मिलने पर सभी पैदल चल कर गोविंद धाम से यहां तक पहुंचे थे। कई दिन बाद नेटवर्क मिलने पर रविवार को उनकी परिजनों से बात हो पाई है।
दशमेश नगर निवासी नरिंदर के अनुसार मदद न मिलने से खफा लोग खुद ही पैदल आगे बढ़े थे, मगर यहां जंगल में पुल ध्वस्त मिला। इससे मुसीबत और बढ़ गई। वे पुल के पास बैठे हैं।
खाने-पीने का सामान भी खत्म हो चुका था मगर शनिवार को ही सेना ने उन्हें खाना दिया और अब उन्हें हेलीकॉप्टर से पार कराने का आश्वासन भी दिया है। अब फिर आसमान पर बादल छाये हैं। इन्हें देखकर फिर डर लग रहा है। युवाओं का यह जत्था 12 जून को हेमकुंड साहिब की यात्रा पर निकला था।