ऊर्जा की बचत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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धीरे-धीरे समझे पश्चिमी देश
साल 1900 में अंग्रेज बिल्डर विलियम विलेट ने घड़ियों का समय आगे बढ़ाने का विचार रखा, जिसे खारिज कर दिया गया। लेकिन 1916 में जर्मनी ने ऐसा करने का महत्व समझा और नई नीति बनाई। धीरे-धीरे कई अन्य देशों ने भी गर्मियों में समय को एक तय अवधि के लिए आगे बढ़ाने की प्रणाली बना ली। अंतत: 1948 में अमेरिका ने एक घंटे समय बढ़ाने की घोषणा की।
फायदा किसे?
अमेरिकी कारोबारी समूह नेशनल एसोसिएशन ऑफ कंवीनियंस स्टोर्स के प्रवक्ता जैफ लेनर्ड के अनुसार दिन का काम खत्म होने तक अंधेरा हो जाए तो लोग सीधे घर चले जाएंगे। फिर घूमने-फिरने, खेलने या दूसरे काम करने कौन आएगा? और अंधेरा न हो तो लोग कुछ न कुछ करने निकलेंगे ही, खरीदारी भी करेंगे तो बिक्री बढ़ेगी। चाहे स्टोर पर या रेस्टॉरेंट में।
दूसरा फायदा ऊर्जा की बचत का गिनाया जाता है। 2008 में अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने बताया कि डीएसटी से अमेरिका 0.5 प्रतिशत बिजली रोज बचाता है। लेकिन आर्थिक शोध ब्यूरो ने कहा कि समय आगे बढ़ाने से लोग घरों में ज्यादा समय रुक रहे हैं, इससे बिजली की मांग एक प्रतिशत बढ़ रही है।