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नेपाल : ललितपुर में मनाई गई 'सिकाली जात्रा', मान्यता है देवी-देवता भी बनते हैं इसके साक्षी

Sat, 24 Oct 2020 01:32 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ललितपुर
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Sikali Jatra in Lalitpur Nepal - फोटो : ANI
नेपाल के ललितपुर के खोखना गांव में लोगों ने शुक्रवार को 'सिकाली जात्रा' मनाई। 'सिकाली जात्रा' देवी सिकली को समर्पित पांच दिवसीय त्योहार है। 

पांच दिनों तक मनाए जाने वाले सिकाली जात्रा देवी "शिकाली" को समर्पित हैं, जिन्हें "अजीमा" या माता देवी के रूप में भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि देवी-देवता भी इंसान का रूप धर कर इसके साक्षी बनने के लिए आते हैं जब वे सिकाली मंदिर के चारों ओर भ्रमण करते हैं जो गांव के बाहर एक घास की पहाड़ी पर स्थित है। 
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Sikali Jatra in Lalitpur Nepal - फोटो : ANI
काठमांडू घाटी के ललितपुर जिले में खोखना के नेवार गांव के एक पुजारी बेखानर महारजन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "घटस्थापना के दिन से जात्रा की शुरुआत हो जाती है। हमारे यहां जमरा या टीका पहनने की परंपरा नहीं है। 
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Sikali Jatra in Lalitpur Nepal - फोटो : ANI
देवी रुद्रयानी या सिकाली को पूरे गांव में एक लकड़ी के रथ में घुमाने के साथ अनुष्ठान की शुरुआत है। जिसके बाद खोकाना में मंदिर के सामने विभिन्न धार्मिक तांबे के बर्तन के साथ विश्राम के लिए रखा जाता है।

इस जात्रा के दौरान रंगीन परिधानों में नकाबपोश नृत्यों के साथ "तांत्रिक" अनुष्ठान किए जाते हैं जो 14 हिंदू देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। 14 देवताओं जिनके मुंह ढके हुए होते हैं उनके साथ सफेद वस्त्र पहने पुजारी भी नृत्य करते हैं। 
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Sikali Jatra in Lalitpur Nepal - फोटो : ANI
यह माना जाता है कि देवी उनके शहर को दुर्भाग्य से बचाती हैं और आपदाओं को भी रोकती हैं। इसके साथ ही, यह किसानों के लिए फसल के बाद के मौसम में खुशी मनाने का अवसर माना जाता है। जात्रा के दौरान दिखाए गए नृत्य विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और धारणा पर आधारित होते हैं। 
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