चारधाम यात्रा अगले माह नौ मई से शुरू हो जाएगी। एक माह आठ दिन ही शेष होने के बावजूद यात्रा मार्गों की दशा और पड़ावों पर सुविधाओं की स्थिति नहीं सुधरी है।
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शुरू होने को है चारधाम यात्रा, लेकिन रास्तों का है 'खतरनाक' हाल
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चार धाम यात्रा मार्ग
केदारनाथ हाईवे भू-धंसाव और भूस्खलन से कई स्थानों पर खतरनाक बना है तो बदरीनाथ हाईवे पर कमेड़ा से लेकर बदरीनाथ धाम तक कई डेंजर जोन नासूर बने हुए हैं।
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चार धाम यात्रा मार्ग
राज्यपाल के निर्देशों के बाद प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई है, लेकिन वक्त काफी कम होने से इस चुनौती से पार पाना आसान नहीं है।
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चार धाम यात्रा मार्ग
बदरीनाथ हाईवे पर कमेड़ा से लेकर बदरीनाथ धाम तक कई डेंजर जोन आज भी नासूर बने हुए हैं। कमेड़ा, लंगासू, देवलीबगड़, मैठाणा, छिनका, बिरही, कोड़िया, पागल नाला, पाताल गंगा, हेलंग, पैनी मोड़, विष्णुप्रयाग, डैय्या पुल, लामबगड़, रड़ांग बैंड और कंचन गंगा में हाईवे अभी भी बदहाल स्थिति में है।
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चार धाम यात्रा मार्ग
आपदा के दौरान बह चुके बैनाकुली में बीआरओ इन दिनों सुधारीकरण कार्य में लगा हुआ है। मैठाणा में हाईवे का अभी तक भी ट्रीटमेंट कार्य शुरू नहीं हो पाया है। यहां पर हाईवे करीब पांच मीटर धंसा हुआ है। यहां पर कर्णप्रयाग की ओर से आने वाले वाहन करीब बीस मीटर तक तीखी ढलान से होकर गुजर रहे हैं।
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हाथी पहाड़ के समीप अभी भी हाईवे पर भारी मलबा और बोल्डर अटके हैं। बीआरओ के कमांडर आर सुब्रमण्यम का कहना है कि यात्रा से पहले जोशीमठ से बदरीनाथ तक हाईवे का सुधारीकरण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। बैनाकुली में डामरीकरण कार्य कर यहां हाईवे को दुरस्त किया जाएगा।
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उत्तरकाशी जिले में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदा में यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे बुरी तरह प्रभावित हुए थे। जगह-जगह भूस्खलन होने से इन यात्रा मार्गों पर दर्जनों डेंजर जोन विकसित हो गए थे। बीते दो वर्षों में हुए सुधार कार्यों के बाद अब यात्रा मार्गों की स्थिति सुधरी है।