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आदमखोर के खात्मे के 90 साल बाद लंदन से उत्तराखंड पहुंची जिम कॉर्बेट की राइफल

Fri, 08 Apr 2016 09:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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जिम कॉर्बेट की राइफल - फोटो : AmarUjala
लगभग 90 साल बाद दुनिया के मशहूर शिकारी की रायफल जब उसी जगह पहुंची जहां उन्होंने आदमखोर को ढेर किया था तो उसे देखने को खूब भीड़ उमड़ी। 2 मई 1925 को इसी रायफल से जिम कार्बेट ने गुलाबराय में आदमखोर गुलदार को ढेर किया था।
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आदमखोर के खात्मे के 90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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जिम कॉर्बेट की राइफल - फोटो : AmarUjala
वर्ष 1905 में लंदन में .275 बोर की इस राइफल को जॉन रिगवे एंड संस कंपनी ने बनाया था। उस समय शिकार करने के लिए यह सबसे बेहतरीन राइफलों में से एक थी। पूर्वाह्न 11 बजे गुलाबराय (भाणाधार) में स्थित जिम कार्बेट पार्क में इंग्लैंड निवासी व लंदन में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर न्यूटन राइफल के साथ यहां पहुंचे। इस मौके पर जनसमुदाय ने उनका जोरदार स्वागत किया।
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आदमखोर के खात्मे के 90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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जिम कॉर्बेट की राइफल - फोटो : AmarUjala
रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में न्यूटन ने अपनी टीम के साथ पार्क में जिम कार्बेट की मूर्ति पर पुष्पगुच्छ चढ़ाया और कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। न्यूटन ने कहा कि जब वह 13 वर्ष के थे, तबसे उन्होंने जिम कार्बेट के बारे में पढ़ा और सुना। उन्होंने वह पुस्तक पढ़ी, जिसमें रुद्रप्रयाग के गुलाबराय में आदमखोर को मारने का जिक्र किया है। ऐसे में इस स्थान को देखने की बहुत इच्छा थी, जो आज पूरी हो गई।

आदमखोर के खात्मे के 90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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इसी पेड़ पर मचान लगाकर कॉर्बेट ने किया आदमखोर का अंत। - फोटो : AmarUjala
समारोह में मुख्य अतिथि जिला जज आशीष नैथानी ने कहा कि राजमार्ग पर स्थित आम के पेड़ पर मचान बनाकर कार्बेट ने गुलदार को ढेर किया था। उस पेड़ को धरोहर के रूप में संरक्षित करने के लिए प्रयास करने होंगे। डीएफओ राजीव धीमान ने जिम कार्बेट के बारे में बताने के साथ ही वन व वन्य जीवों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
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90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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जिम कॉर्बेट की राइफल - फोटो : AmarUjala
1918 से 1925 तक रुद्रप्रयाग व पूरे क्षेत्र में दशहत के पर्याय रहे आदमखोर गुलदार के बारे में वयोवृद्ध काशीराम देवली ने अपने अनुभव साझा किए। बताया कि उनके दादा स्व. ईश्वरी प्रसाद देवली पर गुलदार ने सबसे पहले हमला किया था, तब वह बच गए थे।
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90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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मार्क न्यूटन - फोटो : AmarUjala
गुलदार की दहशत पचास मील क्षेत्र में थी। उसने सैकड़ों लोगों को मारा। सरकारी आंकड़े 125 ही दर्ज हो पाए। वर्ष 1919 में यात्रा के समय गुलदार ने गुलाबराय में एक महिला यात्री पर दोपहर को पहले झपटा मारा और रात को फिर हमला कर उसे मार दिया। गुलदार को मारने के लिए जिम कार्बेट ने 20 रातें झूला पुल पर बिताई थी। तब, पूरे क्षेत्र में बेलणी और चट्वापीपल (गौचर) में ही पुल थे।
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90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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जिम कॉर्बेट की राइफल - फोटो : AmarUjala
मार्क न्यूटन व उनके साथ साथ विदेशी मेहमानों ने बताया कि जिम कार्बेट के भारत के अलावा जर्मनी, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, अमेरिका में भी कई प्रशंसक हैं। इन देशों में जिम कार्बेट दोस्ताना क्लब गठित हैं, जो एक-दूसरे से स्व. कार्बेट के बारे में बातें साझा करते हैं।
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90 साल बाद उसी जगह पहुंची कॉर्बेट की राइफल

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जिम कॉर्बेट की राइफल - फोटो : AmarUjala
ओपी सेमवाल के संचालन में अमेरिका, इंग्लैड़, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जर्मन व अन्य देशों से आए साइमन केन्बार, डेवी ह्यूजेज, जॉन ओटन, डविड साउथ गेट, एनरू केमिन सहित पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा, सीईओ सुभाष चंद्र भट्ट, एसडीओ वन विभाग सोहन लाल, रंगकर्मी प्रेम मोहन डोभाल आदि लोग मौजूद थे।
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