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रहस्यों से भरा नैनीताल: इस जगह बैठकर महादेव ने देखा राम-रावण का युद्ध, तो यहां देवी मां ने दिखाए अपने नौ रूप

Sat, 25 Nov 2023 04:18 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

Famous temple in nainital: उत्तराखंड का नैनीताल जिला पर्यटन के साथ धार्मिक पहचान भी रखता है। यहां देवी-देवताओं के तमाम मंदिर हैं, जहां भक्तों की जमकर भीड़ उमड़ती है। आइए जानते है नैनीताल जिले के चमत्कारी मंदिरों के बारे में।
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शंकर - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। देवभूमि एक ऐसी भूमि है जहां देवी-देवताओं का निवास हैं। हिमालय पर्वत की गोद में बसे उत्तराखंड को ऋषि-मुनियों द्वारा कर्म भूमि भी कहा जाता है। इस भूमि पर देवी-देवताओं के कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी चमत्कारी शक्तियों के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। उत्तराखंड का नैनीताल जिला पर्यटन के साथ धार्मिक पहचान भी रखता है। यहां देवी-देवताओं के तमाम मंदिर हैं, जहां भक्तों की जमकर भीड़ उमड़ती है। आइए जानते हैं नैनीताल जिले के 10 चमत्कारी मंदिरों के बारे में। 

 

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मां पाषाण देवी - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल के ठंडी सड़क पर स्थित मां पाषाण देवी को नैनीताल की सबसे प्राचीन देवी माना जाता है। जितनी पुरानी नैनीताल की झील है, उतना ही पुराना मां भगवती का स्वरूप भी माना गया है। पहाड़ी में देवी मां ने अपने नौ के नौ रूप पत्थर पर दिखाए, इसलिए यह मंदिर पाषाण देवी के नाम से प्रसिद्ध है और नौ रूप होने की वजह से इन्हें नव दुर्गा के रूप में भी पूजा जाता है। 
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भगवान शंकर - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल के भीमताल में स्थित भगवान शंकर का भव्य मंदिर जिसे छोटा कैलाश के नाम से जाना जाता है। भगवान शंकर के मंदिर में बड़ी तादात में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की यहां भीड़ भी देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महादेव ने इसी स्थान पर बैठकर राम और रावण के बीच युद्ध देखा था। पहाड़ी पर बना यह मंदिर काफी पुराना है। 

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भीमेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
भीमताल के तल्लीताल क्षेत्र में स्थित भीमेश्वर महादेव मंदिर काफी पुराना है। करीब 5000 साल पुराने इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का एक शिवलिंग है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने की थी। भीम ने भी यहीं तपस्या की थी। कहा जाता है कि भीम ने अपनी गदा से जोरदार प्रहार कर यहां से पानी निकाला और उसी जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया था। 
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कैंची धाम - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर कैंची धाम स्थित है। यह मंदिर मुख्य रूप से हनुमान जी का है, जिसकी स्थापना बाबा नीम करौली महाराज ने 1964 में की थी। नीम करौली बाबा के भक्त देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में फैले हुए हैं।
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कर्कोटक नागराज का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल के भीमताल की सबसे ऊंची चोटी पर कर्कोटक नागराज का मंदिर स्थित है। यह मंदिर काफी प्राचीन है। शिव पुराण में भी कर्कोटक नाग का वर्णन किया गया है। नाग पंचमी के दिन मंदिर में श्रद्धालु नागराज को दूध चढ़ाते हैं, लेकिन यहां प्रमुख मेला हर साल ऋषि पंचमी के दिन ही लगता है। ऋषि पंचमी के दिन कर्कोटक नागराज का जन्म हुआ था।
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हिडिंबा धाम - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल के सातताल में एक प्राचीन मंदिर हिडिंबा धाम स्थित है। यह मंदिर हिडिंबा पर्वत की चोटी पर स्थित है। लोगों ने बताया कि 1978 में यहां बनखंडी महाराज आए थे और हिडिंबा के मंदिर की स्थापना की थी। इस स्थान पर देश के सभी राज्यों की मिट्टी मौजूद है। 

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हनुमान गढ़ी - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल से महज तीन किमी की दूरी पर हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है। जिसे हनुमान गढ़ी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में अष्टधातु की बनी भगवान राम, सीता माता, श्री कृष्ण और बाबा नीम करौली की मूर्तियां आकर्षण का केंद्र हैं। मान्यता है जो भी यहां आकर भगवान राम और हनुमान की आराधना करते हैं उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। 

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मां शीतला देवी - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल के हल्द्वानी में मां शीतला देवी का एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर घने जंगल से घिरा हुआ है। माना जाता है कि चेचक से ग्रसित लोगों को यहां लाने और माता की आराधना करने से मरीज इस बीमारी से मुक्त हो जाते हैं।
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नैना देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल का नैना देवी मंदिर उत्तराखंड के नौ शक्तिपीठों में से एक है। नैनीताल घूमने आने वाले पर्यटक नैना देवी मंदिर के दर्शन किए बिना वापस नहीं जाते हैं। कहा जाता है कि देवी सती की मृत्यु के बाद जब भगवान शंकर उन्हें कैलाश पर्वत ले जा रहे थे उस दौरान मां की एक आंख नैनीताल में गिर गई थी जिस वजह से इसे नयना देवी के नाम से जाना जाने लगा। 
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