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योगी सरकार के 100 दिन पूरे, वाराणसी में बदलाव...पर रफ्तार धीमी

Tue, 27 Jun 2017 11:00 PM IST
amarujala.com, presented by उत्पल कांत
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सीएम योगी आद‌ित्यनाथ
इस साल 19 मार्च को सूबे की सत्ता संभालने वाले योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री के रूप में आज 100 दिन पूरे हो गए। विधानसभा चुनाव में धमाकेदार जीत के बाद भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर दुनिया को चौंकाया था। सीएम योगी ने सत्ता संभालते ही कई ताबड़तोड़ फैसले लिए। ‌फिर चाहे वो किसानों की कर्जमाफी हो, अवैध बूचड़खानों पर नकेल हो, एंटी रोमियो दस्ते का गठन हो या फिर सूबे में चल रहे कई सारे निर्माण कार्यों की डेडलाइन तय करने का। सीएम योगी ने सूबे में बदलाव लाने की पहल तो की लेकिन समय के साथ उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। आगे की स्लाइड्स में जा‌निए वो कार्य जिनकी रफ्तार काफी धीमी। 
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सीएम योगी आद‌ित्यनाथ
सीएम योगी ने मंगलवार को लखनऊ में सरकार के 100 दिन की उपलब्धियां गिनाईं। सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार सबका साथ सबका विकास के मूल उदेश्य के साथ आगे बढ़ रही।  सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने न सिर्फ भ्रष्टाचार पर अंकुश को कड़े कदम उठाने का इरादा दिखाया बल्कि नीतिगत बदलावों की घोषणा कर यह संदेश दिया था कि सरकार न सिर्फ व्यवस्था सुधारना चाहती है बल्कि प्रक्रियात्मक सुधार कर के भी लोगों की समस्यायों को कम करना चाहती है। सीएम योगी के आने के बाद पीएम के संसदीय क्षेत्र के लोगों की आस बढ़ गई। सरकार में वाराणसी से तीन मंत्री हैं। वाराणसी में बदलाव के लिए काफी कार्य हो रहे हैं मगर उनकी रफ्तार ते नहीं है। आगे की स्लाइड्स में जानिए..
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cm yogi in varanasi - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में विकास कार्यः विधानसभा चुनाव में पीएम संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा को बंपर सफलता मिली। बनारस के लोगों को लगा अब यहां के हालात कुछ बदलेंगे। सीएम योगी भी वाराणसी में विकास कार्यों और कानून व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। यहां हो रहे सामनेघाट पुल, मंडुवाडीह आरओबी, चौकाघाट पुल का दौरा कर उसे तय समय 27 जून तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया था। मगर इन विकास कार्यों की रफ्तार नहीं बदली। 27 जून तो क्या आने वाले 27 जुलाई तक पूरे नहीं हो पाएंगे। वाराणसी में विकास कार्यो की रफ्तार धीमी है। 

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cm yogi in varanasi - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में बिजलीः सीएम योगी ने सूबे के सभी धार्मिक शहरों में 24 घंटे बिजली देने का निर्देश दिया। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति की घोषणा के बाद लोगों को लगा कि अब राहत मिलेगी। मगर ऐसा नहीं हो पाया। धार्मिक नगरी वाराणसी और पीएम के संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद आजकल बिजली में घंटों की कटौती हो रही है। सीएम योगी के 100 दिनों में पूर्वांचल विद्युत् वितरण निगम के तीन प्रबंध निदेशक बदल दिए गए लेकिन हालात जस के तस रहे। बिजली आपूर्ति की रफ्तार वाराणसी में अभी भी धीमी ही है। 
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टूटी सड़क। - फोटो : jaunpur
वाराणसी में सड़कः  सीएम योगी ने सत्ता संभालते ही सूबे की सभी सड़कों को 15 जून तक गड्ढामुक्त करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद  सरकारी महकमें में थोड़ी तेज आई। खराब सड़कों को ठीक किया जाने लगा। थोड़े ही दिनों बाद उसमें तकनीकी दिक्कतें आने लगी। मसलन ठेकेदार, पैसे की कमी,पत्थर-चारकोल की कमी इत्यादि। इसकी नतीजा यह हुआ कि 15 जून तक सूबे की मात्र 60 फीसदी सड़कें ही गड्ढामुक्त हो पाईं। वाराणसी में लगभग यही हाल रहा। प्रमुख मार्गों को छोड़ दें तो लगभग सभी सड़कों की हालत खराब ही है। पीएम के संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद सड़कों को गड्ढामुक्त करने की रफ्तार धीमी है। 
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प्रत‌िभा सम्मान समारोह में योगी

वाराणसी में कानून व्यवस्थाः कानून व्यवस्था के मोर्चे पर पूर्व की सपा सरकार को निशाने पर लेने वाली बीजेपी की अपनी सरकार के समय जातीय और सांप्रदायिक संघर्ष हुए और कार्यकाल के पहले 100 दिन अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष करते बीते। सीएम योगी के राज में कानून व्यवस्था को कड़े करने का हरसंभव प्रयास हुआ। बड़े पैमाने पर अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया। सड़कों पर पुलिस की गश्त बढ़ गई। वाराणसी के चौक चौराहों पर भी पुलिस कर्मी दिखने लगे। इन सबके बावजूद अपराधियों के हौसलों में कोई कमी नहीं आई। 
 
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सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
भ्रष्टाचार पर नकेलः चुनाव पूर्व भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा करने वाली भाजपा सरकार इसके खिलाफ कोई बड़ा कदम नहीं उठाई। पूर्वांचल के धन कुबेर यानी चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव पर कार्रवाई को छोड़ दें तो कोई और बड़ा एक्शन देखने को नहीं मिला। लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट की सीबीआई जांच के आदेश के बाद लग रहा है कि वरुणा कॉरीडोर की भी जांच होगी। इसमें भी बड़े तौर पर भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। इसके अलावा वाराणसी की एतिहासिक नदी वरुणा पर अवैध कब्जा करने वालों का खुलासा होने के बाद भी सरकार के तरफ से कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ। प्रसासन की तरफ से जरूर एक दो तबादले किए गए। जांच टीम गठित की गई ले लेकिन जांच की रफ्तार धामी है। 
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आद‌ित्यनाथ योगी
एंटी रोमियो स्कवॉड के नाम पर उत्पीड़न और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ अभियान ने भी सरकार के लिए कई मौकों पर मुसीबतें खड़ी कीं। जोन में एडीजी और रेंज में आईजी स्तर की तैनाती का प्रयोग सरकार ने किया। हालांकि इस पर भी कुछ लोगों ने सवाल उठे। कई ऐसे अफसरों को फील्ड पर तैनात कर दिया गया जिन्हें लंबे समय से फील्ड पोस्टिंग ही नहीं मिली थी।
 
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