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जन्मदिन पर खासः और जब भीड़ को चीरते हुए पहुंचे थे योगी, बदल गया नजारा

Tue, 05 Jun 2018 01:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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yogi adityanath - फोटो : अमर उजाला

जीवन के 46वें साल में कदम रखने जा रहे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सख्त तेवर और दिलेरी के लिए हमेशा से ही जाने जाते रहे हैं। ऐसा ही एक घटना वर्ष 1998 की है जब गोरखपुर का नखास इलाका तनाव की आग में जल रहा था और योगी के आते ही नजारा बदल गया था।  आगे की स्लाइड में जाने पूरी कहानी...

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yogi adiyanath

शुरुआती दिनों में योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ के सानिध्य में रहे जिनका उन पर बहुत प्रभाव पड़ा। इसके बाद इन्हें गोरक्ष पीठ के उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी दी गई। शुरु से ही आदित्यनाथ
योगी जनता की पीड़ा को सुनने के लिए प्रतिदिन जनता दरबार लगाते रहे हैं। यहां लोगों की समस्याओं का त्चरित निदान किया जाता है।

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yogi adityanath - फोटो : अमर उजाला

जनता की समस्याएं और उनकी सहूलियत हमेशा से ही योगी की प्राथमिकता रही है। इसलिए उन्हें जनता में सम्मान की नजर से देखा जाता है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी ने सीएम योगी से जुड़ा एक वाकया शेयर किया है। उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात के दौरान योगी जी की उम्र बेहद कम थी पर उनमें गंभीरता और दृढ़ता कई गुना ज़्यादा नज़र आई।

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yogi

शलभ ने बताया कि साल 1998 की बात है। उस समय वे पढ़ाई कर रहे थे। तभी गोरखपुर के नखास इलाक़े में एक घटना के बाद तनाव फैल गया। प्रशासन की चूक के चलते दो लोगों की जान भी चली गई। हालात बेक़ाबू से हो गए और तक़रीबन पूरे शहर की भीड़ इस इलाक़े में जा पहुँची। उन्होंने बताया कि उस समय वह और उनके तमाम साथी भी यहाँ मौजूद थे ।

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योगी आदित्यनाथ

हर पक्ष के लोगों में प्रशासन के खिलाफ ग़ुस्सा था। इसी दौरान हम सबने एक हैरान करने वाला नज़ारा देखा। अचानक योगी जी भीड़ को चीरते हुए घटनास्थल पर पहुंचे। हम सब दंग रह गए। ये बेहद संवेदनशील मौका था और उनके साथ कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं था। उन्हें देखते ही पुलिस के भी हाथ पाँव फूल गए । मौक़े पर पहुंचते ही योगी अधिकारियों पर बरस पड़े।

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सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

वहीं जनता उनके पीछे आ खड़ी हुई। ये उनकी अगुवाई और जनदबाव का ही नतीजा था कि प्रशासन सक्रिय हुआ और अगले कुछ घंटों में माहौल सामान्य हो चला। योगी जी के इस अंदाज ने लोगों का दिल जीत लिया और फिर वो लगातार पाँच बार गोरखपुर से जीत कर देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुँचे । ख़ास बात ये थी कि हर चुनाव में योगी की जीत का अंतर बढ़ता चला गया।

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सीएम योगी आदित्यनाथ

शलभ ने एक और घटना का जिक्र करते हुए बताया कि महंत अवैद्यनाथ जब बीमार पड़े तो योगी एक बेहतर उत्तराधिकारी, बेहतर जननेता और बेहतर शिष्य की भूमिका में नज़र आए। जीवन के अंतिम वक्त में जब अवेधनाथ गुड़गाँव के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे तब योगी जी रात-रात भर उनकी सेवा में डटे नज़र आए। ये वो बात थी जो उनको भीड़ से अलग करती थी। एक और खास बात योगी ने आज तक अपना जन्मदिन नहीं मनाया है। हर रोज़ की तरह इस दिन भी वे ख़ूब काम करते नज़र आते हैं।

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