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Year Ender 2021: काशी विश्वनाथ धाम ने लिखी नई इबारत, नए साल में 60 करोड़ में पूरा होगा दूसरे चरण का काम

Mon, 27 Dec 2021 05:12 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
साल 2021 शिव की नगरी काशी के लिए बेहद खास साबित हुआ। काशी विश्वनाथ धाम के जरिए बाबा के भव्य दरबार का वैभव अब दुनिया देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद ही काशी के विकास में मील का पत्थर स्थापित हो गया। धाम का निर्माण 50 हजार वर्गमीटर में 713 करोड़ रुपये की परियोजना लोकार्पित हो चुकी है।

इसमें मंदिर परिसर के साथ ही मुमुक्षु भवन, यात्री सुविधा केंद्र, वैदिक केंद्र, गंगा व्यू गैलरी, भोगशाला, फूड कोर्ट सेंटर, सुरक्षा केंद्र और मंदिर चौक सहित 19 भवन यात्री सुविधाओं के लिए तैयार किए गए हैं। मंदिर चौक से धाम के पूरे परिसर के साथ ही गंगा दर्शन किए जा सकेंगे।

जबकि दूसरे चरण में जलासेन और ललिता घाट से रैंप का निर्माण, एस्केलेटर, रैंप, सांस्कृतिक केंद्र आदि का निर्माण किया जाना है।  जलासेन घाट पर गंगा स्नान के बाद धाम में प्रवेश के लिए प्रस्तावित भव्य मुख्य द्वार का निर्माण भी किया जाना है।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
जलासेन और ललिता घाट को जोड़कर काशीपुराधिपति के प्रवेश द्वार से लेकर भक्तों की सुविधा के लिए होने वाले दूसरे चरण के काम के लिए 60 करोड़ रुपये का  प्रावधान किया गया है। इसमें पंपिंग स्टेशन को अंडरग्राउंड किए जाने से लेकर अन्य काम किए जाने हैं।


 
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
महादेव के दरबार में मंदिर मणिमाला की छटा भक्तों को निहाल कर रही है। 27 मंदिरों की परिक्रमा के जरिये बाबा के गण और विग्रहों के दर्शन प्राप्त हो रहे हैं। यह वे मंदिर हैं, जिनमें कुछ काशी विश्वनाथ के साथ ही स्थापित किए गए थे और बाकी समय-समय पर काशीपुराधिपति के विग्रहों के रूप में यहां बसाएं गए थे। 

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श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
बाबा के दरबार आने वाले श्रद्धालुओं को शिव कचहरी, देव गैलरी, काशी खंडोक्त मंदिरों के साथ 178 विग्रह के दर्शन का पुण्यलाभ मिलेगा। धाम परिसर में निर्माण के दौरान 139 विग्रह, 39 काशी खंडोक्त विग्रह और 27 प्राचीन देवालय मिले हैं।
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा पथ को 33 करोड़ की लागत से सजाया गया है। 25 कोस के इस क्षेत्र में 33 कोटि देवताओं का वास है। इन देवों की समग्र परिक्रमा को पचंक्रोसी परिक्रमा कहते हैं। 
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श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
 मणिकर्णिका तीर्थ पर स्नान करके व्यास पीठ पर संकल्प लेकर श्रद्धालु पंचक्रोशी परिक्रमा पथ पर निकलते हैं। पंचक्रोशी परिक्रमा महाशिवरात्रि, सावन ओर मलमास में की जाती है। 
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