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World Tourism Day: बनारस के ये पर्यटन स्थल, जहां हर वर्ग के लोगों के लिए है कुछ न कुछ

Sun, 27 Sep 2020 05:16 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बनारस शहर। - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी काशी में तो हर माह सैलानी सात समुंदर पार से खींचे चले आते हैं। प्राचीन देवालयों व कला कौशल की काशी में कई ऐसे मनोरम स्थल हैं, जहां पर्यटक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं चूकते। चाहे वो गौतम बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ हो या फिर गंगा घाट।
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रामनगर का किला, काशी विश्वनाथ और बीएचयू विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
बाबा विश्वनाथ मंदिर, रामनगर किला, मानस मंदिर, संकट मोचन से लेकर बीएचयू के विश्वनाथ टेंपल परिसर का भ्रमण करना नहीं भूलते। यूं तो कोरोना काल ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की राह रोक रखी है, लेकिन घरेलू पर्यटकों की आवाजाही अब रफ्तार पकड़ रही है। सारनाथ में तो हर रोज 500 से ऊपर पर्यटक पहुंच रहे हैं।
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दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती, गंगा घाट और बनारस की गलियां। - फोटो : अमर उजाला
देवाधिदेव के दरबार में मत्था टेकने के बाद शुरू होता है भ्रमण
देवाधिदेव महादेव की नगरी में भ्रमण को आने वाले पर्यटक बाबा विश्वनाथ मंदिर में बगैर मत्था टेके नहीं बढ़ते। यहीं प्राचीन देवालयों को देखते हुए पर्यटक काशी की तंग गलियों में भी घूमते हैं। मंदिर से निकलने के बाद पर्यटक गंगा घाटों की ओर निकल पड़ते हैं। दशाश्वमेध व शीतला घाट पर गंगा आरती दर्शन के बाद नाव या फिर पैदल ही अन्य महत्वपूर्ण घाटों का भ्रमण करते हैं।

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वाराणसी एयरपोर्ट, कैंट रेलवे स्टेशन और संकटमोचन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
मानस मंदिर और संकटमोचन का भी करते हैं दर्शन
पर्यटकों की पहली पसंद दुर्गाकुंड पर मानस मंदिर देखना होता है। यहां से भ्रमण के बाद थोड़ी दूर पर स्थित संकटमोचन मंदिर भी पर्यटक जाते हैं। इसके बाद बीएचयू के विश्वनाथ टेंपल परिसर में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही रहती है। इन टूरिस्ट प्लेस पर घरेलू पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है। इन जगहों पर घूमने के बाद लंका से रामनगर किला के दीदार को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों पर्यटक पहुंचते हैं। कैंट रेलवे स्टेशन और बाबतपुर एयरपोर्ट से इन जगहों के लिए टैक्सी और अन्य साधन हर समय उपलब्ध रहता है।
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वाराणसी घाट। - फोटो : अमर उजाला
गंगा में नौका विहार का अलग ही क्रेज
गंगा की लहरों के बीच नाव पर सवार होकर सैलानी सभी 84 घाटों का नजारा लेते हैं और उनके पौराणिक महत्व को समझते हैं। नाव, मोटर बोट व बजड़ा हर समय गंगा घाट किनारे रहते हैं। अब तो अलकनंदा क्रूज का भी संचालन आज शाम से शुरू हो जाएगा।
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sarnath - फोटो : sarnath
काशी घूमने वाले पर्यटकों को भाता है सारनाथ 
भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में देश विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। यहां पहुंचने के लिए हवाई, रेल व सड़क मार्ग का सुगम साधन है। 30 किमी की दूरी पर बाबतपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, सारनाथ में ही रेलवे स्टेशन, कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किमी की दूरी पर सारनाथ है। घूमने के लिए सारनाथ में धमेक्क स्तूप, चौखंडी स्तूप, सीता रसोईया, थाई मंदिर, मूल गंधकुटी विहार सहित चिड़ियाघर भी है। लाइट एंड साउंड सिस्टम भी शुरू हो चुका है।
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बनारस शहर। - फोटो : अमर उजाला
पर्यटन कारोबारियों को 3000 करोड़ का नुकसान
कोरोना से पहले गुलजार रहने वाली काशी में पर्यटकों की कमी है। जिसका असर पर्यटन कारोबार पर पड़ा है। पर्यटन कारोबारियों के अनुसार लगभग 3000 करोड़ का नुकसान हुआ है। पिछले 2019 में देश, दुनिया भर से 67 लाख, 97 हजार 775 पर्यटक काशी आए थे। जिसमें 3.50 लाख विदेशी और 64 लाख  47 हजार 47 हजार 775 पर्यटक शामिल थे।
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