सांस्कृतिक और पर्यटन नगरी के रूप में प्रसिद्ध काशी की आभा निहारने देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के पर्यटक खिंचे चले आते हैं। चाहे वह भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ हो या फिर गंगा की लहरों पर चलने वाले क्रूज और नावें। गंगा की लहरों के बीच नाव पर सवार होकर सैलानी सभी 84 घाटों का नजारा लेते हैं और उनके पौराणिक महत्व को समझते हैं। नाव, मोटर बोट व बजड़ा हर समय गंगा घाट किनारे रहते हैं।
काशी में तो हर माह सैलानी सात समुंदर पार से खिंचे चले आते हैं। प्राचीन देवालयों व कला कौशल को संजोए काशी में कई ऐसे मनोरम स्थल हैं, जहां पर्यटक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं चूकते। अब प्राचीन मंदिरों का स्वरूप भी निखरा है। श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर जब स्वरूप में होगा तो निश्चित ही पर्यटकों की आवाजाही और रफ्तार पकड़ेगी। हालांकि कोरोना संक्रमण काल में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही डेढ़ साल से बंद है, लेकिन घरेलू पर्यटकों की आवाजाही बनी हुई है।
काशी आए और बाबा विश्वनाथ मंदिर का दर्शन नहीं किया तो लगभग सब अधूरा ही रहता है। प्राचीन देवालयों को देखते हुए पर्यटक काशी की तंग गलियों में भी घूमते हैं। मंदिर से निकलने के बाद पर्यटक गंगा घाटों की ओर निकल पड़ते हैं। दशाश्वमेध व शीतला घाट पर गंगा आरती दर्शन के बाद नाव या फिर पैदल ही अन्य महत्वपूर्ण घाटों का भ्रमण करते हैं।
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दुर्गाकुंड
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटकों की पहली पसंद दुर्गाकुंड पर मानस मंदिर देखना होता है। यहां से भ्रमण के बाद थोड़ी दूर पर स्थित संकटमोचन मंदिर भी पर्यटक जाते हैं। इसके बाद बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही होती है। इन टूरिस्ट प्लेस पर घरेलू पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है। इन जगहों पर घूमने के बाद लंका से रामनगर किले के दीदार को पर्यटक पहुंचते हैं। कैंट रेलवे स्टेशन और बाबतपुर एयरपोर्ट से इन जगहों के लिए टैक्सी और अन्य साधन हर समय उपलब्ध रहते हैं।
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गंगा में नौका विहार
- फोटो : अमर उजाला
गंगा के घाटों को निहारने और उसके पौराणिक महत्व को समझने को पर्यटक नौका विहार करते हैं। नाव और क्रूज दोनों के संचालन से पर्यटकों की आवाजाही और बढ़ी है। अब तो काशी-चुनार के बीच भी क्रूज का संचालन शुरू हो गया है। यह पर्यटन को और बढ़ावा दे रहा है। सैलानी जब भी आते हैं तो गंगा में नौका विहार किए बिना नहीं रहते।
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सारनाथ
- फोटो : अमर उजाला
भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचने के लिए हवाई, रेल व सड़क मार्ग का सुगम साधन है। 30 किमी की दूरी पर बाबतपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, सारनाथ में ही रेलवे स्टेशन, कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किमी की दूरी पर सारनाथ है। घूमने के लिए सारनाथ में धमेक स्तूप, चौखंडी स्तूप, सीता रसोईया, थाई मंदिर, मूलगंधकुटी विहार सहित चिड़ियाघर भी हैं। लाइट एंड साउंड सिस्टम भी शुरू हो चुका है।
वाराणसी एयरपोर्ट, कैंट रेलवे स्टेशन और संकटमोचन मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना से पहले गुलजार रहने वाली काशी में पर्यटकों की आवाजाही अब रफ्तार पकड़ने लगी है। पर्यटन कारोबारियों के अनुसार कोरोना ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही पिछले डेढ़ साल से थमी है। हालांकि घरेलू पर्यटकों से बनारस फिर से गुलजार होने लगा है।