विश्व की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी मर्स्क लाइन गंगा में वाराणसी से हल्दिया के बीच शुरू हुए जलपरिवहन से जुड़ सकती है। मर्स्क, मंगलवार को कोलकाता के लिए 16 कंटेनर भेजेगी। हल्दिया से सारे कंटेनर विभिन्न देशों को भेजे जाएंगे। कंटेनर कंपनी पहली बार गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) का प्रयोग करने जा रही है। देखें आगे की स्लाइड्स...
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विश्व की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी मर्स्क लाइन मंगलवार को गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) पर वाराणसी से कोलकाता तक 16 कंटेनर रवाना करेगी। दुनिया भर में मर्स्क के सालाना 12 मिलियन कंटेनर चलते हैं। यह कंपनी पहली बार भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का इस्तेमाल कर रही है। गंगा नदी पर मर्स्क के कंटेनर उसी प्रकार आएंगे जाएंगे जिस प्रकार पेप्सिको, इमामी एग्रोटेक, इफको फर्टिलाइजर, डाबर इंडिया जैसी कंपनियों द्वारा कंटेनर भेजे या मंगाए जाते हैं। मर्स्क के अंतर्देशीय जलमार्ग से जुड़ जाने से, आंतरिक इलाकों से सीधे बांग्लादेश तक और बांग्लादेश से आंतरिक इलाकों तक तथा बंगाल की खाड़ी से होते हुए शेष विश्व तक कार्गो की आवाजाही ही सकेगी।
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12 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) पर भारत का पहला नदी तट मल्टीमोडल टर्मिनल राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने उसी दिन गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) पर कोलकाता से वाराणसी पहुंचे देश के पहले कंटेनर कार्गो को भी रिसीव किया। मर्स्क कंपनी के भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन से जुड़ने को एक उपलब्धि और बड़ी संभावना के रूप में विशेषज्ञ देख रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अगर मर्स्क कंपनी नदी के रास्ते नियमित जलपरिवहन शुरू कर देता है तो यह राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर व्यापारिक गतिविधयों में भी तेजी से उछाल का कारण बनेगा।
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- फोटो : file photo
अधिकारियों ने बताया कि कंटेनर कार्गो परिवहन में कई फायदे निहित हैं। जहां इससे हैंडलिंग लागत कम होती है, मॉडल शिफ्ट आसान होता है। चोरी और क्षति कम होती है। वहीं इससे कार्गो मालिक अपने कार्बन फुटप्रिंट को भी कम कर सकते हैं। सरकार, विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता से हल्दिया से वाराणसी (1390 किलोमीटर) तक 5369 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (गंगा नदी) को विकसित कर रही है। इस परियोजना से 1500-2,000 डीडब्ल्यूटी की क्षमता वाले जलयानों का वाणिज्यिक नौचालन संभव हो पाएगा।
केंद्रीय जल संसाधन, गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी
केन्द्रीय पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अगस्त, 2016 में हल्दिया से वाराणसी तक मारूती कार की एक खेप को हरी झंडी दिखाई। तब से राष्ट्रीय जलमार्गों के कई खंडों पर प्रायोगिक आवाजाही की जा रही है। उनमें से 15 प्रायोगिक आवाजाही सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है जिसमें राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा),भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र) के जरिए एकीकृत जलपरिवहन शामिल है।