Guma thapa
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पिता के सपने ने बनाया वुशू चैंपियन
जब लक्ष्य निर्धारित होता है तो बड़े से बड़ा मुकाम भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। सामान्य परिवार में जन्मी फुलवारिया की गुमा थापा ने भी अपने लक्ष्य निर्धारित किया। पिता तारा बहादुर थापा ने बेटी की सफलता का सपना देखा तो गुमा ने उसे सच कर दिखाया। गुमा ने 11 साल की आयु में कराटे से खेल कॅरियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। कराते के बाद किक बॉक्सिंग और उसके बाद वुशू में कामयाबी हासिल किया। गुमा की माने तो लड़कियों की इस खेल में कम हिस्सेदारी के चलते बड़ा संघर्ष करना पड़ा। गुमा अपनी मेहनत से वुशु में राष्ट्रीय स्तर पर पांच स्वर्ण, तीन रजत, तीन कांस्य जीत चुकी हैं। वहीं किक बॉक्सिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक रजत, राष्ट्रीय स्तर पर आठ स्वर्ण, एक कांस्य, कराते में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक रजत, राष्ट्रीय स्तर पर आठ स्वर्ण, एक रजत जीता है। गुमा को बीएचयू की ओर से 2016-2017 के लिए बेस्ट एथलीट का अवार्ड मिल चुका हे। 2018 में इन्होंने एमपीएड की पढ़ाई पूरी की है।