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तस्वीरें: महाश्मशान मणिकर्णिका पर मोक्ष के लिए नौ घंटे का इंतजार, चेतावनी बिंदु के करीब गंगा का जलस्तर

Tue, 03 Aug 2021 04:40 PM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद मणिकर्णिका घाट पर ऊपर जलतीं चिताएं। - फोटो : अमर उजाला
पहाड़ों पर हो रही बरसात के कारण बनारस में गंगा अब चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ने लगी हैं। जलस्तर बढ़ने से महाश्मशान मणिकर्णिका पर शवदाह के लिए आने वालों को आठ से नौ घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पानी में डूबने के कारण अब छतों पर शवदाह शुरू हो चुका है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर मंगलवार को 67.57 मीटर पहुंच गया। चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से अब तीन मीटर से भी कम दूर जलस्तर रह गया है।

महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पूरी तरह से जलमग्न हो गया। गंगा के बढ़ाव के कारण शव यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। घंटों इंतजार के बाद शवदाह का नंबर मिल रहा है। 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में सात फुट से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। गंगा में आई बाढ़ के कारण अब महाश्मशान में छतों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। नीचे के सभी प्लेटफार्म और लकड़ियां डूब चुकी हैं। शवदाह के लिए यात्रियों को आठ से नौ घंटे का इंतजार करने के बाद नंबर मिल रहा है। अगली स्लाइड्स में भी देखें तस्वीरें...।
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गंगा का जलस्तर बढ़ा। - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को गंगा का जलस्तर 66.52 मीटर और मंगलवार को 67.57 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा के जलस्तर का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है। वर्तमान में चेतवानी बिंदु से जलस्तर तीन मीटर से भी कम दूर रह गया है। गंगा अब खतरे के निशान बिंदु 71.26 मीटर की ओर अग्रसर हो रही है। इसे देखते हुए नौका संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। 
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गंगा का जलस्तर बढ़कर घाट की सीढ़ियों के ऊपर पहुंचा। - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय दुकानदार और शवदाह कराने वाले डोमराजा परिवार के सदस्यों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। डोमराजा परिवार के सदस्यों ने बताया कि आम दिनों घाट पर जहां 30 से 40 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था, लेकिन बाढ़ के कारण प्लेटफार्म और सीढ़ियां पूरी तरह से डूब चुकी हैं। इसके कारण अब छतों पर शवदाह होने से लोगों का इंतजार करना पड़ रहा है। सड़क पर जगह कम होने के कारण लोगों को अंतिम संस्कार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

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वाराणसी में बढ़ रहा गंगा का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला
गंगा के सभी 84 घाटों का संपर्क दो दिन पहले ही टूटने के बाद प्रमुख गंगा घाटों के आरती स्थल भी बदल गए हैं। तेजी से हो रहे बढ़ाव के कारण गंगा के साथ ही वरुणा नदी के किनारे रहने वालों में खलबली मची है। गंगा के पलट प्रवाह के कारण सबसे ज्यादा बाढ़ का कहर वरुणा किनारे रहने वालों को ही झेलना होता है।
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बढ़ रहा गंगा का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला
गंगा में लगातार बढ़ाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने नावों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। उधर, गंगा में बढ़ाव का असर वरुणा नदी पर दिखने लगा है। जिला प्रशासन व एनडीआरएफ वरुणा किनारे भी अपनी चौकियां लगाकर जलस्तर पर नजर रख रही है ताकि किसी भी दशा में आपात स्थिति से निबटा जा सके।
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अस्सी घाट पर जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
बनारस में चेतावनी बिंदु 70.26 और खतरे का निशान 71.26 मीटर पर है। राजेंद्र प्रसाद घाट पर बने जलचौकी तक पानी पहुंच गया है। चौबेपुर के ढाब क्षेत्र में भी गंगा का पानी सोते में प्रवेश कर गया है। ढाब क्षेत्र के लोगों को कटान का डर सताने लगा है। सोते में पानी घुसने से मोकलपुर गांव के संपर्क मार्ग पर पानी भर गया है और लोग नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। इसी तरह से ढाब क्षेत्र के रमचंदीपुर, गोबरहां, छितौना, रेतापार, चांदपुर और आसपास के अन्य गांवों के लोगों की भी समस्याएं बढ़ गई हैं। 
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