वाराणसी की 'पंचक्रोशी परिक्रमा' का विशेष माहात्म्य है। यह यात्रा मणिकर्णिका घाट (कुंड) से शुरू होती है और इसी घाट पर समाप्त भी होती है। पंचक्रोशी यात्रा का अहम पड़ाव काशी का एक गांव है। यह वही गांव है जहां भगवान श्रीराम ने स्वयं अपनी पंचक्रोशी यात्रा के दौरान शिवलिंग स्थापित किया था। अब इस मंदिर और इस गांव की दीवारें इसकी गाथा स्वयं सुनाएंगी। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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- फोटो : amar ujala
पंचक्रोशी परिक्रमा का अहम पड़ाव रामेश्वर मंदिर...। वही रामेश्वर मंदिर जहां भगवान श्रीराम ने स्वयं अपनी पंचक्रोशी यात्रा के दौरान शिवलिंग स्थापित किया था। अब इस मंदिर और इस गांव की दीवारें इसकी गाथा स्वयं सुनाएंगी। एकबारगी गांव में प्रवेश करते ही यहां की संस्कृति से आप खुद ब खुद रूबरू हो जाएंगे। सिर्फ पंचक्रोशी परिक्रमा ही नहीं, यह गांव यहां की गौशालाओं के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसे स्वयं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने स्थापित किया था। गांव की इन दीवारों पर गो माता के अनेक रूप आपको देखने को मिलेंगे।
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- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू दृश्य कला संकाय के विद्यार्थियों की टीम इस रामेश्वर गांव को कुछ ऐसे ही सजा संवार रही है। होप वेलफेयर ट्रस्ट के युवा विलेज टूरिज्म की दृष्टि से रामेश्वर गांव में कार्य कर रहे हैं। इस गांव का माहात्म्य पंचक्रोशी परिक्रम व गौ माता से इतना जुड़ा है कि संस्था के युवाओं ने यहां ‘काऊ विलेज’ प्रोजेक्ट शुरू किया है।
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- फोटो : अमर उजाला
दृश्य कला संकाय के डॉ. सुरेश के नायर के निर्देशन में आठ विद्यार्थियों की टीम गांव की दीवारों पर रंगों के जरिये इस गांव की लोक संस्कृति से परिचय करा रही है। चार गौशाला वाले इस गांव में वाल पेंटिंग का थीम भी इसी गाय ही है। अब तक लगभग 85 फुट लंबी दीवार पर पेंटिंग का काम हो चुका है।
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- फोटो : अमर उजाला
यह गांव विश्व कीर्तिमान का भी गवाह बनने की ओर अग्रसर है। दृश्य कला संकाय के डॉ. सुरेश के नायर ने इस गांव में म्यूरल आर्ट बनाने की योजना बनाई है। ये म्यूरल अब तक का सबसे बड़ा आर्ट होगा जिसमें इस गांव के संस्कृति की पूरी झलक देखने को मिलेगी। पंचक्रोशी परिक्रमा के साथ इस गांव में लगने वाला लोटा भंटा मेला समेत यहां की अन्य खासियतों को म्यूरल में उकेरा जाएगा।
होप के सचिव दिव्यांशु उपाध्याय बताते हैं कि गांव में चार गौशाला हैं और करीब एक हजार गाय। इसे ध्यान में रखते ही काऊ विलेज प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। यही नहीं इस गांव में अतिथियों का स्वागत गाय के दूध से बने उत्पादों जैसे लस्सी, रबड़ी आदि से किया जा रहा है। बीएचयू की टीम में गरिमा, निखिल, प्रीति, सोनल, आकाश, विष्णु, प्रणव व राहुल शामिल हैं।