खुद ही जलाना पड़ रहा अलाव
शीतलहर का सबसे बुरा हाल सड़कों पर जीवन यापन करने वाले मजदूरों का रहा। हालांकि नगर निगम की ओर से अब तक अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है ऐसे में चौराहों, घाटों पर लोग खुद ही अलाव जलाकर वहां बैठे रहे। शहर के चौराहों के साथ ही घाटों पर भी अलाव जलाकर लोग उसके चारों तरफ बैठे रहे। यहां भी स्थानीय और बाहरी जगहों से काशी घूमने आने वाले युवाओं ने आसपास पड़ी लकड़ी को जलाया।