अपनी बेहतरीन तकनीक के लिए दुनियाभर में मशहूर जापान ने घोषणा की है कि वह विश्व के प्राचीनतम शहरों में शुमार बनारस को स्मार्ट सिटी बनाने में मदद करेगा। आगे स्लाइड में जानें में स्मार्ट सिटी वाराणसी में क्या होगा खास...
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shinjo abe pm modi
- फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट सिटी बनारस के लिए मॉडल बनेगा जापान का ऐतिहासिक शहर क्योटो। वाराणसी से सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2014 में जापान यात्रा के दौरान इस समझौते की नींव पड़ी थी। भारत और जापान ने क्योटो-वाराणसी पार्टनर सिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा है कि वाराणसी जापानी शहर क्योटो के साथ कदमताल करते हुए एक विरासत शहर के रुप में विकसित हो। इसी के तहत वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के पीएम शिन्जो अबे को बनारस आमंत्रित किया और दोनों ने साथ-साथ गंगा आरती देखी।
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पीएम मोदी के इस सपने को हकीकत बनाने की घोषणा भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरामेत्शु ने बृहस्पतिवार को की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की संसदीय सीट वाराणसी, चेन्नई और अहमदाबाद को स्मार्ट बनाने में जापान मदद करेगा।
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जापानी राजदूत ने नायडू को बताया कि जापान भारत के शहरी विकास के लिए योजनाओं को लेकर काफी उत्साहित है। नायडू ने बताया कि फिलहाल शहरी विकास पर तेजी से काम करने की जरूरत है। इस पर जापानी राजदूत ने कहा कि जापान इस पर पूरे मनोयोग से काम करेगा।
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सारनाथ्ा वाराण्ासी
भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जापान पांच क्षेत्रों पर फोकस करेगा। ये ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, वाराणसी और उसके आसपास बौद्ध स्थलों को विकसित करना, उद्योग-विश्वविद्यालय के बीच इंटरफेस, कन्वेंशन सेंटर की स्थापना।
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जापान के क्योटो शहर और वाराणसी में काफी कुछ समानताएं हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में क्योटो और बनारस दोनों ने अपनी पहचान बचाकर रखी है। दोनों ही शहर दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। क्योटो में पांच करोड़ और वाराणसी में 50 लाख पर्यटक हर साल आते हैं।
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क्योटो और वाराणसी दोनों ही शहरों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत रही है। क्योटो में जहां एक हजार मंदिर हैं वहीं वाराणसी को मंदिरों के शहर में रुप में जाना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने क्योटो की इसी खूबसूरती को देखकर कहा था कि वे चाहेंगे कि इसी तरह के शहर भारत में भी हों।
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कबीर नगर कॉलोनी में भूमिगत तारों के बाद लगी आकर्षक स्ट्रीट लाइट।
वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए क्योटो की तरह ही अब यहां संस्कृति के संरक्षण, कस्बों की योजना में व्यापक बदलाव, कचड़े में कमी लाने, आउटडोर विज्ञापनों को बंद करने और नदियों के तटों के विकास पर बल दिया जा रहा है।
वाराणसी में बायो फ्यूल के विकास, कचड़े से बिजली बनाने के कार्य भी शुरु हो गए हैं। जापान वाराणसी में कन्वेंशन सेंटर के निर्माण में मदद कर रहा है। इससे शहर में सांस्कृतिक आयोजनों को पंख लगेंगे। ये कन्वेंशन सेंटर सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत बनाया जा रहा है।