चेतसिंह घाट पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रत करती है महिला
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पांच बजने के बाद भी घाटों पर हल्का कोहरा और अंधेरे की चादर तनी हुई थी। श्रद्धालुओं की नजरें भगवान भास्कर के आगमन की प्रतीक्षा में बार-बार पूरब की तरफ ही उठ रही थीं। सूर्याेदय का समय सुबह 6:08 बजे था, पौ तो फट गई लेकिन कोहरे के कारण सूर्य भगवान के दर्शन नहीं हुए। पौ फटने के साथ ही घाट, कुंडों और सरोवरों पर हलचल बढ़ने लगी। महिलाएं पूजा करने के बाद अपने-अपने सूप लेकर पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य का इंतजार करने लगीं। श्रद्धालुओं को लगभग 23 मिनट का इंतजार करना पड़ा और जैसे ही भगवान भास्कर लालिमा के साथ पूरब में नजर आए तो अस्सी से राजघाट तक हर-हर महादेव का जयघोष गुंजायमान हो उठा। छठ के अनुष्ठान, पूजन आरंभ हो गए। महिलाओं ने दूध से उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। गन्ने के मंडप के बीच दीपक जलाकर पूजा अर्चना करने वाली व्रती महिलाओं के परिवार वालों ने बारी-बारी अर्घ्य दिया। भगवान को फल, सब्जियों सहित विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाकर आरती उतारी। सुहागिन व्रती महिलाओं ने एक दूसरे के माथे पर सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य होने का आशीर्वाद दिया। पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद लेने की होड़ मच गई। गंगा तट से लेकर गोदौलिया चौराहे तक कई लोग छठ का प्रसाद लेने केलिए हाथ फैलाए खड़े रहे। ऐसा ही नजारा बरेका सूर्य सरोवर, शास्त्री घाट, अस्सी घाट, राजघाट समेत गोमती के किनारे भी रहा।
एक तरफ नेमी कर रहे थे स्नान, दूसरी ओर चल रहे थे छठ के अनुष्ठान
गंगा के तट पर एक तरफ भोर में तीन बजे से ही कार्तिक का स्नान करने वाले नेमियों की कतार लगी थी। काशी विश्वनाथ की मंगला आरती में शामिल होने वाले नेमियों की कतार गंगा स्नान के लिए बढ़ने लगी। घाट की सीढि़यों पर छठ व्रतियों की भीड़ के कारण किसी तरह रास्ता बनाते हुए सीढि़यों से नीचे उतरे। स्नान के बाद ऊं नम: शिवाय का जाप करते हुए मंदिर की ओर बढ़ चले। बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती जैसे ही समाप्त हुई तो श्रद्धालुओं ने घाटों का रूख कर लिया।