बदलते समय के साथ डिजाइन और स्वरूप बदलने से बनारस लकड़ी उत्पादों के व्यवसाय को नई ऊंचाई मिलने लगी है। बनारस में बने लकड़ी के खिलौनों और इंटीरियर उत्पाद विदेशी ग्राहकों को भी लुभा रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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अब शिल्पी लकड़ी के पारंपरिक खिलौने बनाने की बजाय उनके रंग-रूप में काफी बदलाव किया है। यही नहीं, अब यह व्यवसाय खिलौनों तक ही सीमित नहीं रहा। लकड़ी से घर की साज-सज्जा के खूबसूरत उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। यही वजह है कि अब बनारस में बने लकड़ी के खिलौनों और इंटीरियर उत्पाद विदेशी ग्राहकों को भी लुभा रहे हैं।
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बनारस में बने लकड़ी के खिलौने सात समंदर पार भी खूब पसंद किए जाते रहे हैं। परंपरागत खिलौनों के निर्माण के चलते यह व्यवसाय धीरे-धीरे अपनी पहचान खो रहा था। जीआई पंजीकरण होने और शिल्पियों को प्रोत्साहन मिलने से इस व्यवसाय में फिर तेजी आई है।
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लकड़ी से तैयार मूर्तियां भी खासी पसंद की जा रही हैं। गणेश, शिव, पंचमुखी गणेश, पंचमुखी हनुमान, विश्वकर्मा की आकर्षक मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। भगवान बुद्ध के शीर्ष की भी काफी मांग है। ये मूर्तियां त्योहारों के दौरान पूजन के लिए भी खरीदी जा रही हैं।
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इस क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ने से अब युवा भी जुड़ने लगे हैं। शिल्पी आकर्षक खिलौने, घरों की साज-सज्जा और गृहस्थी से जुड़े आधुनिक उत्पाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इस बार दीपावली पर घर की आंतरिक सज्जा से जुड़े लकड़ी के कई नए उत्पाद बाजार में आए हैं।
बनारस में बने लकड़ी के खिलौने सात समंदर पार भी खूब पसंद किए जाते रहे हैं। परंपरागत खिलौनों के निर्माण के चलते यह व्यवसाय धीरे-धीरे अपनी पहचान खो रहा था। जीआई पंजीकरण होने और शिल्पियों को प्रोत्साहन मिलने से इस व्यवसाय में फिर तेजी आई है।