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फैक्टरी में धधकी आग: धुएं के गुबार के बीच अस्पताल में थमीं सांसें, सहमे मरीज; गत्ता-कॉपर वायर ने भड़काईं लपटें

Tue, 29 Sep 2026 06:35 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में पंखा फैक्टरी के गोदाम में भीषण आग लगी, जिसने अस्पताल में मरीजों की सांसों पर संकट खड़ा कर दिया। आग लगने के बाद धुएं का ऐसा गुबार उठा कि दृश्यता बेहद कम हो गई। 
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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में मुढै़ला तिराहा स्थित पंखा फैक्टरी के गोदाम में लगी भीषण आग ने अस्पताल में भर्ती मरीजों की सांसों पर भी संकट खड़ा कर दिया। देखते ही देखते असमान में काले धुएं का ऐसा गुबार उठा कि अस्पताल के वार्डों तक में दृश्यता बेहद कम हो गई। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल रहा। फैक्टरी के टीनशेड को फाड़कर उठती लपटें और धुएं के गुबार ने हर किसी को सहमा दिया। मेघना अस्पताल के मरीजों और तीमारदारों के कमरे और वार्ड में धुआं भर गया। मरीजों को तुरंत दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। तीसरी और दूसरी मंजिल के लोगों को ग्राउंड फ्लोर पर लाया गया।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
आग की लपटें जितनी तेजी से उठीं, उससे कहीं ज्यादा तेजी से जहरीला धुआं आसपास के इलाके में फैल गया। फैक्टरी में भारी मात्रा में मौजूद प्लास्टिक प्लास्टिक पंखों के ब्लेड, कॉपर वायर और पैकेजिंग गत्तों के जलने से उठा रासायनिक धुआं सीधे अस्पताल की ओर रुख कर गया। अस्पताल के जनरल वार्ड से लेकर प्राइवेट कमरों तक धुएं की गंध पहुंचते ही मरीजों और तीमारदारों में अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई। मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ा।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
जैसे ही धुएं की परत गहरी हुई कई तीमारदार अपने मरीजों को अस्पताल से बाहर सुरक्षित स्थानों पर जाते दिखे। वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों के चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती थी। अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर खिड़कियों को सील करने और तुरंत एग्जॉस्ट फैन चालू करने का प्रयास किया। वहीं, मुढ़ैला तिराहे पर आग देखने वालों की भीड़ और दमकल की गाड़ियों के आवागमन के कारण चांदपुर-रोहनिया मार्ग का एक लेन पूरी तरह जाम हो गया। मंडुवाडीह पुलिस ने रास्ता खाली कराया।

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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
आग की उठती लपटों ने निकाला सुरक्षा का गुबार
तीमारदार वैभव मिश्रा ने बताया कि ऐसा लगा कि अस्पताल के वार्ड में ही धुआं भर गया। तुरंत मरीजों को बाहर निकाला गया। स्थानीय निवासी अनूप शाही ने बताया कि अगर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर पहुंचकर आग पर काबू न पातीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। जिस तरह से फैक्टरी से आग की लपटें उठ रही थीं, उसने सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर व्यावसायिक इमारतों और अस्पतालों के बीच सुरक्षित दूरी व फायर सेफ्टी ऑडिट की जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। सुबह 4 बजे से लगातार उठती आग की लपटों और धुएं के गुबार से 50 मीटर के दायरे में मकान, दुकान और अस्पताल के लोग परेशान हो गए। हर तरफ भागमभाग जैसी स्थिति रही। फायर ब्रिगेड के जवान लगातार आसपास के इलाकों से टैंकरों को रिफिल करते रहे। चांदपुर, मुढै़ला और आसपास के औद्योगिक संस्थानों से पानी भरा गया।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
फायर सुरक्षा की जांच के लिए कमेटी गठित
अग्निशमन स्टेशन अफसर विनोद पांडेय ने बताया कि फैक्टरी की फायर एनओसी थी और आग सुरक्षा बचाव के सभी मानक पाए गए। लेकिन, वहां म में रखे गए केमिकल, कार्टन, उपकरण ने आग में घी की तरह काम किया। आग को बुझाया गया लेकिन गोदाम में रह-रहकर आग की लपटें रात 10 बजे के बाद भी उठती रहीं। 95 फीसदी तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। मंडुवाडीह थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय ने बताया कि आग के कारणों की जांच फायर ब्रिगेड करेगी।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
प्लास्टिक, गत्ते और कॉपर वायर, आग के लिए बने बारूद
फैक्टरी में लगी भीषण आग ने कुछ ही देर में सब कुछ जलाकर खाक कर दिया। दमकल की गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद लपटों पर काबू तो पा लिया, लेकिन इस अग्निकांड ने कई गंभीर सवाल पीछे छोड़ दिए हैं। शुरुआती तौर पर आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, लेकिन जिस तेजी से आग ने विकराल रूप लिया, उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह सिर्फ एक हादसा था या सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा। ये सिर्फ फैक्ट्री नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर स्टॉक रखने का गोदाम भी था। अंदर पंखों के प्लास्टिक के बॉडी पार्ट्स, फाइबर फिनिश ब्लेड्स, कॉपर बाइंडिंग और पैकेजिंग के लिए रखे गए सैकड़ों गत्ते (कार्टन) ठसाठस भरे हुए थे। ये सभी सामान आग के लिए बारूद बन गए। प्लास्टिक और फाइबर के जलते ही अत्यधिक तीव्र ज्वलनशील गैसें बनीं, जिसने आग में घी का काम किया। गत्तों और पॉलिथीन पैकेजिंग ने लपटों को सेकंड्स में एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचा दिया।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
अग्निशमन अधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक गोदामों में क्षमता से अधिक सामान डंप कर दिया जाता है। अग्निकांड के दौरान सबसे बड़ी समस्या वेंटिलेशन (हवा की निकासी) की आई। यहां हवा और धुएं के निकलने का सही रास्ता न होने के कारण अंदर अत्यधिक ऊष्मा बनती गई, जिससे थर्माकोल और प्लास्टिक के पार्ट्स खुद-ब-खुद सुलगने लगे। फैक्टरी में आग लगने के दौरान सिर्फ एक गार्ड था। फिलहाल मंडुवाडीह पुलिस और फायर ब्रिगेड आग लगने के सटीक कारणों की जांच में जुटी है। फॉरेंसिक और इलेक्ट्रिकल सुरक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह महज एक तकनीकी खराबी (शॉर्ट सर्किट) थी या फिर सुरक्षा इंतजामों में बरती गई कोई बड़ी लापरवाही।  

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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
आसपास के मकान खाली कराए, अस्पताल का गेट बंद कराया
आग की लपटें बढ़ती देख मंडुवाडीह थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय ने एहतियातन आसपास के मकानों में रहने वाले लोगों को बाहर निकलवाया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पास स्थित मेघना अस्पताल और अन्य मकानों में रहने वालों की भी अलसुबह नींद टूट गई। धुआं उठता देख पुलिस ने मेघना अस्पताल का दूसरा गेट भी बंद करा दिया। ऊपरी मंजिल पर भर्ती मरीजों और वहां मौजूद कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर नीचे पहुंचाया गया। आग और धुएं के कारण अफरातफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी घरों से बाहर निकल आए। वाराणसी-रोहनिया मार्ग से गुजर रहे राहगीर भी रुककर आग की भयावहता देखते रहे।

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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
सड़क से संकरे मार्ग पर फैक्टरी, सटा हुआ था निजी अस्पताल
चांदपुर-रोहनिया मार्ग स्थित फैक्टरी की ओर जाने का रास्ता संकरा रहा। इस वजह से दमकल विभाग की गाड़ियां गेट तक नहीं पहुंच सकी। अग्निशमन अधिकारी विनोद पांडेय ने बताया कि सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी हो रही थीं और पाइप के जरिये आग पर पानी की बौछार मारी जा रही थी। फैक्टरी के ठीक सामने मालिक का मकान भी है। वहां और आसपास मकानों की छतों से लोग पानी की बौछारें मार रहे थे। दमकल विभाग ने कई तरह के रसायन, फोम और पानी का इस्तेमाल किया। रात 10 बजे तक 95 फीसदी आग पर काबू पाया जा चुका था।

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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
दो से ढाई किलोमीटर दूर तक दिखता रहा धुआं
आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि तेज गर्मी के कारण फैक्टरी की दो मंजिला इमारत के स्तंभ आगे की ओर झुक गए। इससे भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो गया। फैक्टरी से उठता धुआं दो से ढाई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। फैक्टरी प्रबंधक अनादिशंकर गुप्ता ने बताया कि आग से कई करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। निदेशक इस समय हैदराबाद में हैं। आग पूरी तरह बुझने के बाद भंडार और तैयार माल का मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही वास्तविक नुकसान का आकलन हो सकेगा।

सूचना पर तुरंत दमकल की टीमें पहुंच गई। आग की भयावहता देख कुल आठ टैंकर लगाए गए। 50 की संख्या में दमकलकर्मी तैनात किए गए। लगभग डेढ़ लाख लीटर पानी की बौछार मारकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। -आनंद सिंह राजपूत, सीएफओ

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पंखा फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
हाल के महीनों में आग लगने की प्रमुख घटनाएं
  • 13 जुलाई 2026: दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के चितरंजन पार्क के पास गंगा घाट के समीप एक पुराने भवन में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई, जिस पर दमकल विभाग ने तुरंत काबू पा लिया।
  • 19 जून 2026: फूलपुर थाना क्षेत्र में गेल के सीएनजी पंप के पास स्थित प्लास्टिक पाइप भंडारण यार्ड में भीषण आग लग गई, जिसे ढाई घंटे की मशक्कत के बाद बुझाया गया।
  • 12 अप्रैल 2026: नई सड़क स्थित होटल (एचएम इंटरनेशनल) में देर रात शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई, जिसमें कुछ लोग झुलस गए।
  • 10 दिसंबर 2025: उर्वशी कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर स्थित एक ब्यूटी पार्लर में आग लगी, जिसे दमकल विभाग ने सुरक्षित नियंत्रित कर लिया।
सभी फोटो; महमूद खाना, अमर उजाला, वाराणसी
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