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बनारस की प्रसिद्ध मलइयो, कंठ से नीचे उतरते ही चकराएंगे कि खाया या पिया, स्वाद भी जरा हटके

Sun, 09 Dec 2018 10:45 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
बनारस अपने घाटों, पान और बनारसी साड़ी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसके अलावा इस शहर की पहचान यहां मिलने वाले मिठाईयों से भी है। बनारस में दूध दही से बनने वाली खाने पीने की चीजों का स्वाद आपको कुछ अलग हट के मिलेगा।  कुछ चीजें तो ऐसी जो बनारस के सिवा और कहीं भी नहीं मिलेंगी।  इसी में से एक है सर्दी के तीन महीनों तक मिलने वाली मिठाई मलइयो। मलइयो का स्वाद निराला है। इस मिठाई पर बनारस का एकाधिकार है। मलइयो इतनी चमत्कारी है कि कि कुल्हड़ के कुल्हड़ हलक से उतर जाने के बाद भी आप तय नहीं कर पाएंगे कि इसे खाया या पिया है। इस मिठाई की ऐसी कई खास बातें हैं जिसे जानकर आश्चर्य होगा। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
ठिठुराती ठंड में गुनगुनाती धूप सा एहसास देती है बनारस की मलइयो। मुंह में जाते ही घुल जाती है और तासीर ऐसी तो देर तक जुबान पर मिठास बनाए रखती है। काशी की पहचान बन चुका मलइयो का जायका सिर्फ ठंड के दिनों में ही लिया जा सकता है। इसकी भी अपनी वजह है। क्योंकि, ये खास मलइयो ओस की बूंदों से बनता है। जैसे जैसे ठंड बढ़ती है, इसकी खासियत भी बढ़ने लगती है।

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
 बनारस में पक्के महाल से लेकर चौक, मैदागिन, गोदौलिया, दशाश्वमेध, गिरजाघर चौराहे तक मलइयो की दुकानें सज गई हैं। वैसे तो इस दौर में अब दक्षिण के पकवान कश्मीर में मिलते हैं और पंजाब की लस्सी आसाम व सिक्किम में लेकिन मलइयो पर अब भी काशी का ही एकाधिकार है जो विदेशों तक मशहूर है। दूध से बनने वाली मलइयो की शुरुआत सैकड़ों साल पहले बनारस में ही हुई थी।

 

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varanasi - फोटो : अमर उजाला
 मलइयो को बनाने के लिए पहले कच्चे दूध को उबाला जाता है। उबले दूध को रात भर खुले आसमान में रख दिया जाता है ताकि इस पर ओस पड़ सके। भोर होते ही दूध को मथा जाता है। दूध को मथने के बाद निकलने वाले झाग में चीनी, केसर, पिस्ता, मेवा, इलायची मिलाकर मलइयो तैयार होती है और फिर उसे कुल्हड़ व मटकी में सजाकर पेश किया जाता है। ओस की वजह से ही मलइयो का झाग घंटों बना रहता है। 

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
मलइयो बनाने की शुरुआत पक्के महाल में चौखंभा से हुई थी। चौखंभा गोपाल मंदिर से इसका दायरा जो बढ़ा तो आज चौक, गोदौलिया ही नहीं अस्सी व लंका तक इसकी दुकानें सज गई हैं। मलइयो के लिए खास तौर पर ठंड में विदेशी मेहमान आते हैं।
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
अब तो शादी ब्याह में भी मलइयो पेश किया जाने लगा है। अब लोग मशीन से भी इसे तैयार कर रहे हैं। 300 से लेकर 400 रुपये प्रति किलो मलइयो मिल रहा है। वहीं 15 रुपये से लेकर 30 रुपये तक छोटे, मीडियम और बड़े साइज के कुल्हड़ में ये मिलता है।
 
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मलइयो मौसमी आइटम है और ठंड के मौसम में ही मजा देता है। तैयार होने के बाद ऊपर से पिस्ता और बादाम की कतरनों का तड़का इसके जायके को समृद्ध करता है।
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